गुरुवार, फ़रवरी 09, 2023

रचना :- राजू कुमार..!

स्वयं को पहचान..!

स्वयं को पहचान ओ मानव,
स्वयं को तू जान रे,
असीम ऊर्जा है तेरे अंदर,
तू सच में बड़ा महान रे।।१।।

दूजा नहीं कोई तेरे जैसा ,
सच कहता यह जहान रे ,
कर सकता तू  कुछ भी चाहो,
इतना तू बलवान रे ।
स्वयं को पहचान ओ मानव,
स्वयं को तू जान रे।।२।।

मानव है तू मैं भी कहता ,
नहीं तू भगवान रे ,
पर चाहो तू बन सकते हो,
एक सच्चा ज्ञानवान रे।
स्वयं को पहचान ओ मानव,
स्वयं को तू जान रे।।३।।

क्यों हार जाते हो एक पल में,
क्या तुझे नहीं यह ध्यान रे,
सर्वश्रेष्ठ है तू इस जग में,
तेरे अंदर बसता भगवान रे।
स्वयं को पहचान ओ मानव,
स्वयं को तू जान रे।।४।।

जाग उठो और कर डालो,
जग में कुछ ऐसा काम रे ,
होगा कुछ कल्याण देश का,
और तेरा होगा नाम रे ।
स्वयं को पहचान ओ‌ मानव,
स्वयं को तू जान रे।।५।।

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हम बच्चे हैं वीर सेना..!

हम बच्चे हैं वीर सेना,
 हार कभी न मानेंगे,
जब तक न हो लक्ष्य पूरा,
आगे बढ़ते जायेंगे ।

चाहे लाख तूफान आ जाये,
 चाहे आये आंधी पानी ,
पीछे न मुड़कर देखेंगे ,
हम आगे बढ़ते जायेंगे ।
हम बच्चे हैं वीर सेना,
हार कभी न मानेंगे ।।१।।

देश की मिट्टी मुझे है प्यारी,
प्यारा मुझे है अपना गांव,
 मेहनत से इसे सजायेंगे,
 हम आगे बढ़ते जायेंगे ।
हम बच्चे हैं वीर सेना ,
हार कभी न मानेंगे।।२।।

 जो शिक्षा से रहा अछूता,
 अपने साथ बिठाएंगे ,
छोड़ेंगे न साथ हम उसका,
 हाथ पकड़ पढ़ायेंगे ।
हम बच्चे हैं वीर सेना,
 हार कभी न मानेंगे ।।३।।

प्यारे वतन के लोग यहां पर,
 प्यारी अपनी माटी है,
 चंदन सा इसे महकायेंगे ,
हम आगे बढ़ते जायेंगे ।
हम बच्चे हैं वीर सेना,
 हार कभी न मानेंगे।।४।।


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मैं बरहेट हूं !

हूं मैं एक पवित्र धरा,
 बरहेट मेरा नाम है।

 वीरों की यह पुण्य भूमि,
 सिदो- कान्हु से पहचान है,
 वीरों की मैं कहती गाथा,
 क्रांति स्थल जिनका नाम है।
 हां मैं बरहेट हूं,
 बरहेट मेरा नाम है ।।१।।

बाबा भोले की यह भूमि,
 गाजेश्वर का धाम है,
 छल - छल बहती नदी यहां की,
 गुमानी ही तो जान है ।
हां मैं बरहेट हूं ,
बरहेट मेरा नाम है ।।२।।

लोग यहां के हैं मेहनती,
 देते श्रम का दान है ,
आपस में रहते मिलजुल कर सब, 
करते सबका सम्मान है ।
हां मैं बरहेट हूं ,
बरहेट मेरा नाम है ।।३।।

रीड़ मेरी है हटिया पाड़ा,
 रोज लगता जहां पर जाम है,
 त्रस्त यहां की युवा जनता,
 न जाता किसी का ध्यान है।
 हां मैं बरहेट हूं ,
बरहेट मेरा नाम है।।४।।

 बिजली पानी की समस्या,
 यहां की पुरानी पहचान है ,
आते नेता भाषण देते,
 पूरा न होता काम है ।
हां मैं बरहेट हूं ,
बरहेट मेरा नाम है।।५।।

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नारी तू बड़ी महान है..!

नारी तू बड़ी महान है ,
हर घर की तू सम्मान है ,
तुझसे ही सबकी मान है,
 तुझसे ही तो सम्मान है,
 स्वयं को पहचान ओ नारी ,
तू सच में बड़ी महान है ।।१।।

इस जग की निर्माता तू ही ,
तू ही पालनहार है ,
बिना नहीं तेरे कुछ भी जग में,
 सूना लागे यह संसार है ,
नारी तू बड़ी महान है ,
हर घर की तू सम्मान है।।२।।

 ममता की एक मूरत तू ही,
 सुंदरता की तू साज है ,
हर बच्चों का प्यार तू ही ,
तू ही सबकी नाज है ,
नारी तू बड़ी महान है,
 हर घर की तू सम्मान है ।।३।।

बच्चे की प्यारी मां है तू,
 भाई की प्यारी बहना,
 पिता की प्यारी बेटी तू ही,
 पति की तू तो प्राण है ,
नारी तू बड़ी महान है,
 हर घर की तू सम्मान है।।४।।

 तू न हो अगर इस जग में तो,
 सृष्टि का होता अंत है,
 तू है तो इस संसार में ,
खुशियां काफी अनंत है ,
नारी तू बड़ी महान है,
 हर घर की तू सम्मान है।।५।।

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अपना भारत..!

भारत तेरे अनेकों नाम,
इंडिया, आर्यावर्त, हिंदुस्तान ,
जहां जन्म को देव तरसते,
जहां प्रेम अमृत है बरसते ,
हे भारत तू है बड़ा महान ,
करूं मैं बारंबार प्रणाम।।१।।

शांति का तूने पाठ पढ़ाया,
बंधु - बांधव का संदेशा लाया,
पिरो कर सबको एक सूत्र में,
विश्व गुरु फिर स्वयं कहलाया ,
हे भारत तू है बड़ा महान ,
करूं मैं बारंबार प्रणाम ।।२।।

तू भूमि है आध्यात्म की,
देवभूमि है परमात्म  की,
देता तू है सदा संदेशा,
आत्मशुद्धि व शास्त्र की,
हे भारत तू है बड़ा महान,
करूं मैं बारंबार प्रणाम ।।३।।

योग का है दर्शन करवाया,
शून्य का सबको पाठ पढ़ाया,
शिक्षा का तूने अलख जगाकर,
मानवता का मार्ग दिखाया,
हे भारत तू है बड़ा महान,
करूं मैं बारंबार प्रणाम ।।४।।

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बचपन..!

जब मैं छोटा बच्चा था,
बड़ी शरारत करता था,
कितनो खालो लाठी - डंडा ,
नहीं किसी से डरता था।।१।।

एक बार कुछ ऐसा हुआ,
मेरे मन को मैंने छुआ ,
सोचा चलो कुछ अच्छा कर लें, 
पढ़ाई मन से सच्चा कर लें।।२।।

मैंने फिर एक पुस्तक पकड़ा, 
पढ़ने लगा मैं खड़ा-खड़ा,
फिर मुझसे सब खुश हुआ,
प्यार करने लगी सब मौसी-बुआ।।३।।

होकर खुश सबने गले लगाया ,
मेरे मन को खूब हर्षाया,
पापा ने भी खुशी-खुशी से,
मेरे लिए खिलौना लाया।।४।।

इसीलिए मैं कहता बच्चों,
तुम भी मन से करो पढ़ाई ,
रहो मिल-जुल कर खुशी-खुशी, 
आपस में न करो लड़ाई ।।५।।

तुमको भी खूब प्यार मिलेगा ,
जो चाहो बार- बार मिलेगा, 
पढ़- लिख लो मेरे प्यारे बच्चों, 
मौका नहीं हर बार मिलेगा।।५।।

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आपका हुनर - आपकी मंजिल..!

आपकी डिग्रियां धरी की धरी रह जाएंगी,
आपका हुनर ही आपको मंजिल तक ले जाएगी.

सरकारे आएंगी- सरकारी जाएंगी , 
बड़े-बड़े सपने भी दिखाएंगी,
फॉर्म भरवाने के नाम पर ,
आपसे ही रुपया कमाएगी,
न नौकरी न रोजगार मिल पाएगी,
बस चुनावी मुद्दा बन के रह जाएगी.

आपकी डिग्रियां धरी की धरी रह जाएंगी,
आपका हुनर ही आपको मंजिल तक ले जाएगी .

शिक्षा के नाम पर लाखो लूट मचाएंगे,
बिल्डिंग तो बनवाएंगे,
पर शिक्षक बहाल नहीं करवाएंगे, 
पुस्तक ,ड्रेस व साइकिल भी बटवाएंगे,
पर न मिलेगी शिक्षा न पुस्तक पढ़ावाएंगे,
तो हम भला शिक्षित कैसे बन पाएंगे ?

आप की डिग्रियां धरी की धरी रह जाएगी ,
आपका हुनर ही आपको मंजिल तक ले जाएंगी.

पढ़ाई के नाम पर लाखों खर्च करवाएंगी,
शिक्षित बनाके आपको ,
एम.ए. - बी.ए. की डिग्रियां थमाएगी.
मांगो फिर रोजगार तो ,
हुनर की बात बताएगी ,
तो सोचो और विचार करो ,
जीवन की पहिया ,
आगे कैसे बढ़ पाएगी ?

आप की डिग्रियां धरी की धरी रह जाएंगी ,
आपका हुनर ही आपको मंजिल तक ले जाएगी.

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जीवन एक संघर्ष गाथा..!!

कर्म पर है अधिकार तुम्हारा,
फल का न तुम हकदार हो ,
सच्चे मन से मेहनत कर लो ,
तेरी मुट्ठी में संसार हो।।१।।

दुःख को क्यों लिए फिरते हो,
यह जीवन का एक सार है।
सुख- दुःख न  मिले जीवन में तो,
 होता न यह उद्धार है ।
कर्म है अधिकार तुम्हारा ,
फल का न तुम हकदार हो ।।२।।

दुःख अगर हो तो दुःखी जताओ,
 खुशीयों पर मोती लहराओ।
समय नहीं है बस में तेरे ,
मात्र कर्म का ही तू हकदार हो।
 कर्म पर है अधिकार तुम्हारा ,
फल का न तुम हकदार हो।।३।।

क्यों करते हो ज्यादा चिंता,
क्यों तुम दुख जताते हो ।
नहीं है तेरे बस में कुछ भी ,
क्यों ज्यादा पछताते हो ।
कर्म पर है अधिकार तुम्हारा,
फल का न तुम हकदार हो।।४।।

जीवन कहता संघर्ष करो तुम,
हार क्यों तू मान जाते हो ।
दुनिया तेरी कदम चूमेगी ,
यह क्यों तू भूल जाते हो ।
कर्म पर है अधिकार तुम्हारा,
फल का न तुम हकदार हो।।५।।

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दीपावली..!

चलो जलाएं दीप वहां ,
जहां आज भी अंधेरा है।

सबका है त्योहार दीपावली ,
सबको रौशन प्यारा है ।
रहे नहीं अंधेरा कहीं पर,
ऐसा प्रयास हमारा है।
चलो जलाएं दीप वहां,
जहां आज भी अंधेरा है ।।१।।


एक दीपक उन्हें समर्पित ,
जिसने प्राणों को न्यौछारा है।
प्राण उन्हें भी प्यारा था,
पर मां भारती ने उन्हें पुकारा है ।
चलो जलाएं दीप वहां ,
जहां आज भी अंधेरा है ।।२।।

निवास करे जो जंगल-पहाड़ों पर, 
उनको भी भारत प्यारा है ।
एक दिया उन्हें भी देना,
यही संस्कार हमारा है ।
चलो जलाएं दीप वहां,
जहां आज भी अंधेरा है।।३।।

जिसका नहीं है कोई अपना, 
जिसका नहीं कोई सहारा है ।
एक दीपक वहां भी जलाना,
उनको भी दीपक प्यारा है ।
चलो जलाएं दीप वहां,
जहां आज भी अंधेरा है।।४।।


मेरे सपनों का भारत..!

देखा मैंने है एक सपना,
नया भारत बनाएंगे ।

न झुका है न झुकने देंगे,
न रुका है न रुकने देंगे ,
काम कुछ ऐसा कर जाएंगे ,
विश्व गुरु फिर कहलाएंगे, 
खोया जो धरोहर अपना ,
वापस उनको लाएंगे ।

देखा मैंने है एक सपना ,
नया भारत बनाएंगे ।।१।।

गांव - गांव व शहर - शहर में,
शिक्षा का अलख जगायेंगे,
शिक्षा देकर सब लोगों को, 
शिक्षित - संस्कारी बनाएंगे,
न रहेगी गरीबी यहां पर,
न बेरोजगार कहलाएंगे ।

देखा मैंने है एक सपना,
नया भारत बनाएंगे ।।२।।

घूसखोरी और जमाखोरी का, 
काला धंधा मिटायेंगे ,
भ्रष्टाचार का जाल हटाकर, 
सदाचारी कहलाएंगे,
ईमानदारी का पाठ पढ़ाकर,
उन्नत राष्ट्र बनाएंगे,

देखा मैंने है एक सपना,
नया भारत बनाएंगे ।।३।।

सौ वर्षों के  इस सफर में ,
बदलाव बहुत कुछ लाएंगे,
रह गया जो काम अधूरा,
पूरा कर दिखलाएंगे ,
बिछुड़ गए जो विकास पथ से, 
मुख्य धारा में लाएंगे,

देखा मैंने है एक सपना,
नया भारत बनाएंगे ।।४।।

जाति - पाती का भेद मिटाकर,
 समरसता का भाव जगायेंगे,
भारत की एकता की खातिर, 
राष्ट्रीयता का पाठ पढ़ाएंगे ,
एक भारत हो श्रेष्ठ भारत हो,
संकल्प यही दोहराएंगे,

देखा मैंने है एक सपना,
नया भारत बनाएंगे।।५।।

स्त्री शिक्षा- सम्मान की खातिर,
मातृ भाव जगायेंगे ,
सबको साथ- साथ चलने को,
एकता के गीत दोहराएंगे ,
देवी स्वरूपा नारी शक्ति ,
घर-घर पूजे जाएंगे ,

देखा मैंने है एक सपना ,
नया भारत बनाएंगे ।।६।।

गांव- गांव व शहर - शहर तक,
वंदे - मातरम गाएंगे,
गूंज उठेगी भक्ति जागरण,
सबको राष्ट्रभक्त बनाएंगे ,
सेना भी अब सीना तान कर,
दुश्मन को धूल चटाएंगे,

देखा मैंने है एक सपना,
नया भारत बनाएंगे।।७।।

आधुनिकता के इस युग में ,
युवा शक्ति को जगायेंगे ,
तकनीक- तंत्र- उद्योग से जोड़कर,
सशक्त भारत बनाएंगे,
अविष्कारों के इस दुनिया में,
परचम अपना लहराएंगे ,

देखा मैंने है एक सपना ,
नया भारत बनाएंगे ।।८।।

अपना सपना है बस इतना,
श्रेष्ठ भारत बनाएंगे,
जो देश अलग हुआ है हमसे,
फिर से वापस लाएंगे,
आज नहीं तो कल ही सही,
अखंड भारत बनाएंगे ,

देखा मैंने है एक सपना,
नया भारत बनाएंगे।।९।।

*************************

मैं भी एक शिक्षक बन पाता..!!
काश ! मैं एक शिक्षक बन पाता,
मानव से भगवान बन जाता ।

अशिक्षा का हो जहां अंधेरा ,
शिक्षा का मैं दीप जलाता ।
जहां - जहां शिक्षा नहीं पहुंची, 
वहां - वहां शिक्षा पहुंचाता ।
शिक्षा का एक दीप जलाकर,
अशिक्षा को दूर भगाता । 
काश ! मैं एक शिक्षक बन पाता,
मानव से भगवान बन जाता है।।१।।

चाह नहीं है सुविधाओं की,
इच्छा बस शिक्षा देने की ।
शिक्षा से ही बढ़ पाओगे,
इच्छा रखो तुम पढ़ पाओगे ।
यही बात सबको बतलाता ,
शिक्षा का मैं अलख जगाता ।
काश ! मैं एक शिक्षक बन पाता,
मानव से भगवान बन जाता।।२।।

क से कलम व ज्ञ से  ज्ञानी,
रोज नई मैं पाठ पढ़ाता ।
अंधकारमय जीवन में उनके, 
शिक्षा का मैं दीप जलाता।
बिन शिक्षा न जीवन संभव,
बात उनको मैं रोज बतलाता।
काश ! मैं एक शिक्षक बन पाता,
मानव से भगवान बन जाता ।।३।।

जो करे देश का निर्माण,
मैं उसका निर्माण कर पाता।
खेल - खेल में शिक्षा देकर ,
बच्चों का मसीहा बन जाता।
मन की बोझो को दूर रखकर ,
मैं भी छोटा बच्चा बन जाता।
काश ! मैं एक शिक्षक बन पाता,
मानव से भगवान बन जाता है।।४।।

*********************

पिता :- एक अनमोल रत्न..!
पिता न हो अगर इस जग में तो
घोर अंधेरा छाएगा,
सूरज से निकली किरणें भी 
रौशन न कर पाएगा।

अपने जीवन के अनुभव से
तुमको मार्ग दिखाएगा ,
भटक गए जो अपने पथ से 
सच्चा पथिक बनाएगा ।
पिता न हो अगर इस जग में तो 
घोर अंधेरा छाएगा ।।१।।

जब पड़ जाओ कष्टो में तो 
सारा कष्ट हर जाएगा ,
तेरे हर एक कठिनाइयों को
कंधे से अपने लगाएगा ।
पिता न हो अगर इस जग में तो 
घोर अंधेरा जाएगा ।।२।।

कितनी भी तुम गलती कर लो
माफ वही कर पाएगा ,
मार-डांट-फटकार लगाकर 
सीने से फिर चिपकायेगा ।
पिता न होकर अगर इस जग में तो, 
घोर अंधेरा छाएगा ।।३।।

जीवन में  खुशियां लाने को
रात को दिन कर जाएगा ,
अमृत तुम्हें पिलाने को वो
खुद जहर पी जाएगा ।।
पिता न हो‌ अगर इस जग में तो ,
घोर अंधेरा छाएगा ।।४।।

जब तक सफल न हो पाओ
साथ  न तुम्हारा छोड़ेगा ,
आने वाली हर बाधाओं को
एक पिता ही तोड़ पाएगा।

पिता न हो अगर इस जग में तो 
घोर अंधेरा छाएगा ,
सूरज से निकली किरणें भी 
रौशन न कर पाएगा ।।५।।

*************

अकेलापन..!

जब विचारों की नदियां बहने लगे, 
जब अपनों की याद आने लगे,
जब तुम्हारी बात स्वयं से होने लगे, 
तब समझ जाना यही तुम्हारा अकेलापन है .

जब पुरानी बातें याद आने लगे ,
जब बिछुडो की याद सताने लगे,
जब अपनों से मिलने को जी चाहने लगे ,
तब समझ जाना यही तुम्हारा अकेलापन है .

जब दिल की बात मन सुनने लगे , 
जब तुम्हारा मन तुम्हें सुनने लगे,
जब मन लगाने को तुम गाने सुनने लगे ,
तब समझ जाना यही तुम्हारा अकेलापन है .

जब अपना चेहरा शीशे में देख तुम मुस्कुराने लगो,
अपना ही ड्रेस अपने को अच्छा लगने लगे,
और जब अपना थकावट अपने आप मिटने लगे,
तब समझ जाना यही तुम्हारा अकेलापन है.


********************

असफलता :- एक चुनौती..!

कौन कहता है लोग जीवन में असफल नहीं होते हैं,
जो असफल नहीं होते वह सफल भी नहीं होते हैं .
प्रत्येक सफलता को असफलता ही राह दिखाते हैं, 
प्रत्येक वो सपना जो दिन में देखे जाये, 
सफल पाए जाते हैं .
थोड़ा -थोड़ा मेहनत करके ही लोग आगे जाये जाते हैं .
फिर आप क्यों पीछे रह जाते हैं, 
क्यों बाद में पछताते हैं, 
क्यों दुखी के आंसू बहाते हैं ,
क्यों औरों पर आरोप लगाते हैं ,
क्यों हंसना भूल जाते हैं?
फिर सुनो - 
हार व जीत का दौर कभी बंद नहीं होता ,
शेर की दहाड़ कभी मन्द नहीं होता. 
उठो व निकल पड़ो सफलता की राह पर, 
क्योंकि सफलता का द्वार कभी बंद नहीं होता. 
हार या जीत किसीका अपना नहीं होता ,
इसे तो मेहनत के पेड़ों पर उगाए जाते हैं.
कहा जाता है 
मेहनत के बल पर पत्थरों पर भी फूल उगाए जाते हैं .
तो बंद करो यह नाटक 
असफल होने की, क्योंकि सफलता के पेड़ नहीं ,
मेहनत के बीज बोए जाते हैं.

********************

संताल हूल :- हमारा गौरव-सिद्धू-कान्हू, चांद-भैरव..!

भारत की आजादी का सर्वप्रथम बिगुल जिसने बजाया था, 
वह वीर सिद्धू ,कानू ,चांद ,भैरव आपस में सब भाई था.

हजारों सैनिकों की फौज खड़ा कर अंग्रेजों का नींद उड़ाया था ,
यह भूमि मेरी मातृभूमि है यह एहसास दिलाया था .
अन्ग्रेजो को जब तक ना भगाया इन्हें नींद कहां पर आया था.
गरीब किसानों के जीवन पर कर्ज का जब बादल मन्डराया था ,
इन्हीं क्रांति वीरों ने इन्हें अंग्रेजों से बचाया था .

भारत की आजादी का सर्वप्रथम बिगुल जिसने बजाया था ,
वह वीर सिद्धू कानू चाँद भैरव आपस में सब भाई था.

जल,जंगल,जमीन की खातिर जिसने अपना जीवन गंवाया था,
अपने तीर के बल पर अंग्रेजों को नानी याद दिलाया था .
किसीने कहा आजादी तो चरखे से आया था, 
तो इन वीरों ने तीर क्या अंग्रेजों के स्वागत में चलाया था .
हूल की हुंकार भरो और दहाड़ कर कहो आजादी तो तीर से ही आया था.

भारत की आजादी का सर्वप्रथम बिगुल जिसने बजाया था, 
वह वीर सिद्धू कानू चांद भैरव आपस में सब भाई था.

गुरुकुल एकेडमी के विद्यार्थियों ने मनाया अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस..!
साहिबगंज :- 21/06/2021. करे योग रहे निरोग, इसी मंत्र के साथ बरहेट प्रखंड के गुरुकुल एकेडमी के विद्यार्थियों द्वारा योग, आसन, व्यायाम व सूर्य नमस्कार कर अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया..! योग शिक्षक राजू कुमार ने कहा कि योग सभी प्रकार के  कष्टों के निवारण में सक्षम है. आज प्रत्येक व्यक्ति शारीरिक व मानसिक रूप से बीमार है .सभी शांति की खोज में इधर-उधर भटक रहे हैं .ऐसी परिस्थिति में योग ही एकमात्र उपाय है जो हमें शांति के मार्ग पर ले जा सकती हैं..!

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वर्तमान शिक्षा का उद्देश्य..!
बढ़ती बेरोजगारी का मुख्य कारण हमारी वर्तमान शिक्षा व्यवस्था है. आज का समय सिर्फ किताबी ज्ञान की ही नहीं बल्कि व्यवहारिक ज्ञान की होनी चाहिए .अब हमें हमारे विद्यार्थियों को सिर्फ कापी,कलम व किताबों तक ही सीमित नहीं रखना चाहिए. बल्कि उन्हें रोजगार परक शिक्षा प्रदान करनी चाहिए. यानी कॉपी, कलम व किताब के साथ-साथ कार्य कौशल  की शिक्षा प्रदान करनी चाहिए. बढ़ती बेरोजगारी वर्तमान युवाओं के मन पर बहुत ही गहरा प्रभाव डाल रहा है. वह स्वयं को इतना कमजोर व असहाय महसूस करता है की अब वह स्वयं को समाप्त करने में ही अपनी भलाई समझने लगा है . अब शिक्षा का उद्देश्य सिर्फ प्रमाण पत्र देना ही नहीं बल्कि जीविका को चलाने वाली होनी चाहिए. पढ़ाई समाप्ति के साथ ही अगर युवाओं को रोजगार प्राप्त हो जाए तो हमारा देश व समाज बहुत सारी बुराइयों व समस्याओं से बाहर आ जाएगा .  अब हमें मिलकर मौजूदा शिक्षा अवस्था को बदलना पड़ेगा .अब हमें प्रमाण पत्र वाली शिक्षा व्यवस्था से निकलकर कार्य कौशल वाली शिक्षा व्यवस्था को अपनाना पड़ेगा .अब बच्चों के अंदर बचपन से ही उनके पसंद और उसी रुचि के विषय पर विशेष ध्यान देकर उन्हें उसी विषय का  विशेषज्ञ बनाने पर ध्यान देना पड़ेगा .इस विषय पर शिक्षक ,समाज व सरकार को एक साथ मिलकर चिंतन करने की आवश्यकता है..!

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माँ का दुलार व पत्नी का प्यार..!

इस संसार में मां 
व पत्नी की क्या माया है..!
एक धरती पर लाया तो 
दूसरे ने साथ निभाया है..!! 
एक माँ जिसने तुम्हारी 
काया को रगड़-रगड़ नहलाया है,
तो दूसरे ने मन के बोझो को 
कोसों दूर भगाया है. 
जब डरा करते थे बचपन में 
पल्लू में मां ने छुपाया है ,
वह त्याग कम है क्या 
जो तुम्हारा साथ निभाने 
अपनों से दूर आया है. 
तुमने तो मां का दुलार 
व पत्नी का प्यार पाया है, 
फिर क्यों अपना चेहरा 
रुमाल से छुपाया है, 
ओ मां ने मारी 
व पत्नी से डांट खाया है,
जरूर तुमने व्रत वाले दिन 
बिना नहाकर खाया है .
दोष तो अपना है 
और कहते हो सब पराया है, 
तो सुनो-नसीब वालों ने ही 
मां का दुलार व पत्नी का प्यार पाया है..!


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मेरा सपना :- अखंड भारत..!
अखंड भारत की दिशा में 
राष्ट्र ध्वज लहराया है..!
आज काश्मीर का दिल जीत कर 
माँ भारती का सम्मान बढ़ाया है...!
अनेको हुए बलिदान यहां पर, 
अनगिनतो ने गोली खाई है..! 
बहुतों ने अपने रिश्ते खोये,
लाखों ने रक्त बहायी है...!!
मेरी मातृभूमि 
केवल जमीन का टुकड़ा नहीं ,
यह त्याग व समर्पण की कमायी है ..!
अब राष्ट्र को और टूटने ना देंगे, 
यह कसम हमने खाई है...!!
अखंड भारत की दिशा में 
राष्ट्र ध्वज लहराया है..!
आज काश्मीर का दिल जीत कर
माँ भारती का सम्मान बढ़ाया है...!
घाटी भी अब जाग उठा है,
राष्ट्र भक्तों के गान से..!
अब ना रुकने वाले हैं हम ,
फहरेगा तिरंगा शान से ...!!
आतंक भी अब कांप उठा है ,
सेना के वीर गान से ..!!!
हमने भी जीवन त्याग दिया है, 
राष्ट्र धर्म के नाम से...!!!!
अखंड भारत की दिशा में 
राष्ट्र ध्वज लहराया है..!
आज काश्मीर का दिल जीत कर
माँ भारती का सम्मान बढ़ाया है...!

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आलेख :- रब नवाज़ आलम نامنگار :- ربنواز عالم

साहिबगंज की बेटी सीमा सिंह को बिहार में मिला गार्गी अचीवर्स अवार्ड..! साहिबगंज :- 15/03/2024. साहिबगंज शहर की बेटी सीमा सिंह को अंतरराष्ट्री...