क्विज प्रतियोगिता में खुशीलाल पंडित, शिवम कुमार एवं आनंद कुमार ने मारी बाजी..!
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हिंदी का महत्व..!
भारत का आधार है हिंदी ।
राष्ट्रभाषा की निशान है हिंदी,
हर भारतीयों की पहचान है हिंदी।
छोड़ विदेशी भाषा को,
हिंदी भाषा को अपनाया था,
1977 के दशक में यूएन में ,
भारत का परचम लहराया था।
अटल ने अपने भाषण से पहली बार,
यूएन में हिंदी की गूंज सुनाया था।
लगभग दुनिया के हर देश में आज,
भारतीयों का है निवास ।
जिसके कारण हिंदी भाषा का ,
दुनिया में हो रहा समग्र विकास ।
हिंदी के विकास में ,
भारतेंदु हरिश्चंद्र का था कठिन प्रयास,
जिनके कारण भारतेंदु को।
हिंदी का पितामह हम बुलाते आज।
इतिहासो में भी हिंदी से,
बड़े पुराने नाते थे ।
मीरा, कबीर ,निराला सब ,
हिंदी के ही गुण गाते थे ।
तन में हिंदी मन में हिंदी,
इस मिट्टी के कन कन में हिंदी ।
भारत का इतिहास है हिंदी,
मातृभाषा की आस है हिंदी ।
हिंदी है दुनिया में खास ,
बोली इसकी है मिठास ।
अनेकता में एकता की आस,
हिंदी पर है सबको विश्वास ।
आज छोड़ हिन्दी भाषा को ,
विदेशी भाषा बोले जा रहे हैं।
हिंदी के महत्व को हम ,
खुद से ही मिटा रहे हैं ।
तो छोड़ो विदेशी भाषाओं को,
मातृभाषा का सम्मान करो ।
सब मिलकर हिंदी भाषा का ,
अब दुनिया में ऊंचा नाम करो।
गुरु :- ज्ञान का प्रकाश..!
हमारे लिए भगवान हो।
ज्ञान बांट के अपने जीवन का,
हम छात्रों का कर रहे कल्याण हो।
शिक्षा की आस हो,
आप ज्ञान का प्रकाश हो।
मुश्किले चाहे कितनी भी हो,
आप हमेशा हमारे साथ हो।
बिना गुरु के गुमनाम है हम,
सच और झूठ से नादान हैं हम।
गुरु हमारे हैं पहचान ,
मां-बाप के बराबर उनका स्थान।
इतिहास गवाह है हमारा ,
गुरु बिन कोई महान नहीं ।
गुरु के चरणों में काट दिया अंगूठा,
एकलव्य जैसा कोई धनुर्धर इंसान नहीं।
गुरु अपना काम कर रहे ,
अब फर्ज हमें निभाना है।
छू के आसमा की बुलंदियों को,
गुरु के मान को और अभी बढ़ाना है।
अपनी कृपा बनाए रखना हम पर,
गुरु बिन हम इस दुनिया में गुमनाम है।
गुरु से ही शुरू गुरु पर ही खत्म,
हमारी तो बस यही पहचान है।
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रोग कष्ट को दूर भगाती,
करे योग रहे निरोग -
बात यह दुनिया को बताना है,
योग के द्वारा अपने अंदर-
शरीर की बीमारी को हराना है।
नित्य दिन करने से योग-
हमारा शरीर रहता निरोग,
योग आंशिक विकार मिटाता-
और हमें बलवान बनाता।
घर पर रहकर करें योग-
2 गज की दूरी का भी-
सभी कोई करें उपयोग,
योग के हैं कई प्रकार-
दूर हो जाते सारे विकार।
योग दिवस मनाने की-
भारत में शुरुआत हुई,
योग करने के लिए पूरी दुनिया-
आज हमारे साथ हुई।
योग को आगे बढ़ाना है-
पूरी दुनिया में फिर से,
भारत को विश्व गुरु बनाना है।
आओ मिलकर करें योग-
दुनिया को हम करे निरोग।
अमर शहीद :- लक्ष्मीबाई..!
लक्ष्मीबाई नाम था उसका-
आजादी उसको प्यारी थी,
बचपन से ही उसके मन में-
एक दबी हुई चिंगारी थी।
उस दबी हुई चिंगारी ने फिर-
जन्म दिया एक ज्वाला को,
क्रांतिकारी बनी छबीली-
त्याग सिंहासन की माला को।
आजादी के लिए निकल पड़ी-
वो उठा तलवार-कृपान-भाला को,
अपने पीछे जगा गई वो -
आजादी के मतवाला को।
सन् 1857 में -
पूरे देश का खून खौल उठा,
आजादी के नारों से-
यह भूमंडल भी डोल उठा।
आरंभ हो गया युद्ध प्रचंड-
हर तरफ हुई लड़ाई थी,
एक अकेली लक्ष्मीबाई ने-
सौ-सौ को मार गिराई थी।
स्वतंत्रता की वह देवी थी-
हमें आजादी दिलाने आई थी,
पीठ पर बच्चा लेकर भी उसने-
दोनों हाथों से तलवार चलाई थी।
देश के लिए शहीद हुई वो-
उसने गोरी शासन की नींव हिलाई थी,
अंग्रेजों से लड़ने वाली वह-
अकेली मर्द कहलाई थी।
अपना शीश कटा के जिसने-
आजादी की मतलब हमें समझाई थी,
अपना शीश कटा के जिसने-
आजादी की मतलब हमें समझाई थी।
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तंबाकू छोड़ो, जीवन से रिश्ता जोड़ो..!
तंबाकू छोड़ो खुश रहो -इसने सबको बिगाड़ा है,
कौन तुम्हें समझाएगा -
तुम्हारा जान कितना प्यारा है।
छोटी-छोटी पूड़ियों मे तुम-
जहर क्यों निगले जा रहे हो,
अपने सुख के जीवन को तुम-
मौत से मिलवा रहे हो ।
यह मत सोचो तंबाकू खा के -
माँ-बाप को धोखा दे रहे हो,
अपने जीवन के पल को तुम-
अंदर ही अंदर खो रहे हो ।
युवाओं में नशाओ की -
समस्या बहुत गंभीर है ,
नशे के चंगुल में फस कर-
अपने से हो रहे दूर है ।
कोई याद मिटाने को पीता तो-
कोई शौक दिखाने को ,
कोई नशे मे धूत होकर -
अपने आप को बड़ा बताने को।
तंबाकू के ऊपर लिखा हुआ है-
यह हानिकारक- जानलेवा है,
फिर भी इसे खाते हो तुम -
क्या अब नहीं तुम्हें जीना है।
तो छोड़ो इन आदतों को-
तंबाकू का विरोध करो ,
आओ सब मिलकर अब -
दुनिया को निरोग करो !
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यास, मंजर-ए-तबाही..!
पता नहीं हिंदुस्तान में-
कैसी आफत आई है..??
कभी कोरोना कभी ताऊते-
अब यश ने तबाही मचाई है..!
बंगाल की खाड़ी से उठा तूफान
ओमान में उसका नाम दिया,
इस भयंकर तूफान ने -
सबका है विनाश किया..!
यास के कारण आसमान में -
काली घटा छाई थी,
तेज हवाओं के झोंकों ने-
घर के छप्पर तक उड़ाई थी..!
रास्ते सारे बंद पड़े थे -
हर तरफ मची त्राहि थी,
कोई तूफान से तबाह हुआ था-
कहीं पूरी बस्ती जल में समाई थी..!
जीवन पूरा अस्त-व्यस्त कर दिया-
इस भयंकर तूफान ने,
कितने जाने निगल गया-
यस चक्रवाती तूफान ने।
यास बेशक चला गया-
पर नई समस्या जोड़ गया,
जलमग्न हुए इलाकों में-
वह महामारी को छोड़ गया..!
जलमग्न हुए इलाकों में ,
वह महामारी को छोड़ गया..!!


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