बुधवार, नवंबर 08, 2023

आलेख :- अमित लाल यादव..!

मुझमे बदलाव..!

मैं जैसा हूँ वैसा ही रहूँगा
जैसा हूँ वैसा ही तुम्हें स्वीकार करना होगा
मुझमें कुछ बदलाव चाहिये तो
तुम्हें भी बदलना होगा
इज्जत चाहिए गर दूजों से तो
पहले इज़्ज़त देना सीखना होगा
पंख लगाकर उड़ने का हुनर रखता हूँ
तुम्हें शौक़ नहीं उड़ने का तो
मुझे रोकना बंद करना होगा
साथ जो दे सको तो ईमानदारी रखना
बेईमानी भरे रिश्तों से परहेज रखना होगा
साथ जो चलना हो लम्बे सफ़र पर
कुछ बातें तुम्हें कुछ मुझे
नज़रअंदाज़ करना होगा
मैं जैसी हूँ वैसे ही तुम्हें स्वीकार करना होगा
मुझमें कुछ बदलाव चाहिये
तो तुम्हें भी बदलना होगा..!

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झूठ, व्यसन, व्यभिचार, हिंसा और चोरी इन पाँचों महापापों से मनुष्यों को अलग रहना चाहिए :- राजीव.!
साहिबगंज :- 20 /12/2022. गुप्त ज्ञान तथा गूढ़ रहस्य को प्रकट और अति सरल करने वाले बीसवीं सदी के महान संत सद्गुरु ब्रह्मलीन सद्गुरु संतसेवी परमहंस महाराज की 103 वीं पावन जयंती 20 दिसंबर को मनाई गई..! उक्त जयंती का आयोजन प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी 20 दिसंबर को महर्षि मेंही आश्रम, छोटा पंचगढ़, जिरवाबाड़ी, साहिबगंज में मनाई गई..! जिसमें संतवाणी के आधार पर प्रवचन दिया गया..! जिसमें सतगुरु महाराज के व्यक्तित्व, कृतित्व एवं उनके उपदेशों पर प्रकाश डाला गया..! कार्यक्रम में सैकड़ों की संख्या में धर्मानुरागी सत्संग प्रेमी का आगमन हुआ..! कार्यक्रम में शोभायात्रा पूर्वाहन 7:00 बजे से निकाला गया..! शोभायात्रा आश्रम से चौक बाजार सत्संग भवन तक का हुआ..! साथ ही ध्यान, योगाभ्यास, प्रातः कालीन सत्संग एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई..! तदुपरांत भजन एवं भंडारा कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया तत्पश्चात रात्रि कालीन सत्संग एवं ध्यान का भी आयोजन किया गया..! सत्संगी राजीव रंजन ने बताया कि झूठ बोलना, नशा खाना, व्यभिचार करना, हिंसा करनी अर्थात् जीवों को दुःख देना वा मत्स्य-मांस को खाद्य पदार्थ समझना और चोरी इन पाँचों महापापों से मनुष्यों को अलग रहना चाहिए..! एक सर्वेश्वर पर ही अचल विश्वास, पूर्ण भरोसा तथा अपने अन्तर में ही उनकी प्राप्ति का दृढ़ निश्चय रखना, सद्गुरु की निष्कपट सेवा, सत्संग और दृढ़ ध्यानभ्यास इन पाँचों को मोक्ष का कारण समझना चाहिए..!

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साइबर ठगों ने ओ०टी०पी० लेकर उड़ाए टोटो चालाक के खाते से 1,46,520/- रुपए..!
साहिबगंज :- 11/11/2022. देश में बढ़ते डिजिटलाइजेशन के साथ ही साइबर क्राइम भी बढ़ता ही जा रहा है..! अपराधियों ने गूगल से लेकर इंटरनेट पर अपना जाल बिछाया हुआ है..! जिसमें हर दिन लाखों लोग फंसकर लाखो रुपये की ठगी का ​शिकार हो रहे हैं..! ऑनलाइन ठगी का शिकार हुए पीड़ित जिरवाबाड़ी निवासी प्रकाश रजक थाने में दिए तहरीर में बताया की बीते कल मोबाइल नंबर 9874705918 से कॉल आया जिसमे मेरा नाम लेकर मुझे बताया गया कि एसबीआई हेल्पलाइन से बोल रहा हूं, आप अपना क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल नहीं करते तो बंद कर दें..! मैंने कहा कि बंद कर दिया जाए..! फ़ोन पर मुझे बताया गया की आपके मोबाइल में मैसेज जाएगा उसे बताना है..! मेरे द्वारा पूछे जाने पर कहा कि आप नजदीकी शाखा से संपर्क कर सकते हैं..! मैंने उसे मैसेज में आये ओटीपी बता दिया..! इसके पश्चात मेरे खाते से 1,46,520/- रुपए की निकासी हो गई.! पीड़ित ने कहा कि मैं बहुत ही गरीब आदमी हूं, टोटो चला कर अपना व अपने परिवार का भरण-पोषण करता हूँ..! पीड़ित ने मामले की शिकायत पुलिस से की है..! पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है..!

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भूमिहीन किसानों को जमीन देना होगा :- सुनील सिन्हा..!
साहिबगंज:- 07/11/2022. केंद्र सरकार की गलत नीतियों की वजह से देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, संप्रदायिक प्रभाव व वादाखिलाफी को लेकर जनता दल यूनाइटेड का एक दिवसीय धरना संपन्न..! धरना प्रदर्शन में सुनील सिन्हा ने कहा कि देश में महंगाई चरम पर है..! अराजकता का माहौल कायम है..! भय, भूख, भ्रष्टाचार का आलम है..! आम जनता थका हुआ महसूस कर रहा है, देश की जनता हताश-निराश मायूस है..! अच्छे दिन आएंगे सपना दिखाने जैसा लग रहा है..! जैसा कि जादूगर जादू दिखाता जो देखने में सभी को अच्छा लगता है लेकिन सच्चाई नहीं होता है..! जीएसटी लाने से एक तरफ सरकार की आमदनी में वृद्धि हुई है वही दूसरी तरफ जीएसटी के कारण व्यापारी ग्राहक और आम आदमी ज्यादा परेशान हुए और महंगाई बढ़ी, एमआरपी वस्तु पर कम नहीं किया जा रहा है जबकि बताया गया कि किसी वस्तु का काम 70 परसेंट कम होगा लेकिन कम नहीं हुआ और अधिक बढ़ गया..! पेट्रोलियम पदार्थों के दाम में बेतहाशा वृद्धि होने की वजह से आम जनता त्रस्त है..!प्रत्येक लोगों को रोजगार देंगे लेकिन केंद्र सरकार की गलत नीतियों के कारण जो नौजवान रोजगार में थे उन्हें भी मार्केट का हवाला देते हुए काम से निकाल दिया गया जो बहुत ही चिंतनीय विषय है..! देश की जनता को मुख्य रूप से बिजली, पानी, भय, भूख, भ्रष्टाचार, जातिवाद, संप्रदायवाद समस्यायो में उलझा है और राजनीतिक दल हिंदू, मुसलमान, सिख, इसाई की राजनीति कर रही है..! भाषा, धर्म, संप्रदाय का विभाजन स्थापित करने के लिए समाज के व्यापक और उनके मूल्यों को ताक पर रखने की कोशिश जारी है..! जनता दल यूनाइटेड के सुनील सिन्हा ने एक दिवसीय धरना के माध्यम से निम्नलिखित मांगों के द्वारा सरकार का ध्यान आकर्षित किया..!
खाद्य पदार्थों, पेट्रोलियम पदार्थों, बेतहाशा बस भाड़ा का मूल्य वृद्धि वापस किया जाए..! बेरोजगारी एवं पलायन को रोकने के लिए बेरोजगारों को काम मुहैया कराया जाए..! साहिबगंज में खनिज आधारित उद्योग धंधों की स्थापना किया जाए..! सरकारी कार्यालय में कर्मचारी, अस्पताल में डॉक्टर एवं विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर की जाए..! महंगाई पर सख्ती से रोक लगाई जाए ..! वेरोजगार को काम का अधिकार और बेरोजगारी भत्ता दिया जाए..! 

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राज बचाओ माँ लाज बचाओ, भोजपुरी समाज बचाओ
अश्लीलता की गर्द मची, आओ माँ कुछ इन्हे सिखाओ
कुछ तो नासमझी में गाये, कुछ सुनकर आगे बढ़ाएं
कुछ ने तो है ठेका ले रखा, 
अपने टीआरपी के लिए अश्लील बतियाए
सबको सुपर स्टार चाहिए अश्लीलता का बाजार चाहिए
समाज की फिक्र नहीं किसी को,
बस हर एक शेयर पर मिलियन व्यू और सब का प्यार चाहिए
दोषी नहीं सिर्फ गायक इसमें ना ही दोषी कोई कलाकार,
थोड़ी बहुत जिम्मेदारी है हमारी क्यों नहीं करते हम ऐसी चीजों का इनकार,
अश्लील है गाना अश्लील है वीडियो हम कहते हैं लाइव में
खुद प्रयोग कर ईयर फोन का
अश्लील देखते और सुनते ए साइड में
एक थोड़ा रफ गाया तो दूसरा थोड़ा टफ गया 
मानो जैसे बाजार लगी हो जिससे जो मनाया 
उसने वो गाया
एक दूसरे को अश्लील बतातेऔर बात बात में वो गलियाते 
पहले खुद में विनम्रता लाओ
बड़े प्यार से फिर समझाओ
फिर भी समझ ना आए जब तो
फिर उन पर बैन लगाओ
ना करोगे अश्लील कभी तुम 
तो ना कोई कभी दोहराएगा
है नम्र निवेदन आप सभी से दिखे अश्लील जहां कहीं भी 
करे रिपोर्ट और डिस्क्राइब और डिसलाइक 
फिर मजाल नहीं कोई अश्लीलता फैलाएगा 
फिर मजाल नही कोई अश्लील गाएगा
नेक होकर जो करेंगे कोशिश कुछ ना कुछ तो रंग लाएगा
फिर मजाल है कोई अश्लीलता फैला आएगा

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हे जगत जननी जगदम्बा माँ
    आया हूँ मै तेरी शरण मे ,
देदे माँ थोड़ी सी जगह 
    अपनी चरण मे,
तरस रहा हूँ कब से माँ 
    मै तेरे दर्शन को
राह निहारूँ मईया मोरी 
चैन नही अँखीयन को
    बेटा तेरा निर्धन खाली
झुलुहा लगाय नीमीया डाली
     लेके अपनी सिंघ सवारी
आओ ना माँ छोड़ पहाड़ी,
         लगी है मन मे आश माँ 
  ना करना निराश माँ,
       जागे सोये भजन करूँ मै
हर पल तेरा मनन करूँ मै
      हे जग माता
एक तु ही विख्याता
     दर से तेरे ना खाली कोई जाता
करते महावीर तेरी अगुवाई
           श्रीधर की थी जब कठीन परिक्षा
     भैरो जी पहुँचे लेने को भिक्षा
 श्रीधर पर हुई माँ की कृपा
        इछित भोजन ना पाकर
भैरो भईया हुए खफा
   भैरो भईया ने जीद ठानी
उन्हे थी माँस मदिरा खानी
         माँ ने फिर इनकार किया
  हाँथ जोडकर श्रीधर बोला
        क्षमा करें हे महर्षि
ये है वैष्णो माँ का भंडारा
  बाबा ने श्रीधर को फटकारा
फिर उसने माँ को ललकारा
      माँ ने भैरो को समझाया
भैरो ने रचा मायाजाल
       क्रोधीत होगई मईया रानी
अपना रूप किया विकराल
         भैरो को कुछ समझ ना आया
    माँ ने उसका शिष उड़ाया
           तब हुआ भैरो को ज्ञान
  अंतिम क्षण किया माँ का गुणगान
        भैरो को माँ ने दिया वर्दान
   मेरी पुजा जब जब होगी
                 तुम्हे भी पुजेगी 
    दुनिया जहान,
     हे जगत जननी जगदम्बा माँ
    आया हूँ मै तेरी शरण मे ,
देदे माँ थोड़ी सी जगह 
    अपनी चरण मे

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ना दिल से ना दिमाग से
हूँ मैं एक फौजी, 
हमेशा खेलता हूं बारूद और आग से
सर पर वतन का सेहरा बांध 
निकलता हूं धाक से
जब लगाता हूं निशाना 
तो बचता है कोई दुश्मन इत्तेफाक से
ना तीर से ना तलवार से 
बस डरता हूं तो अपनी हार से
हो भारत मां का बेटा है फौलादी बाहें
कोई जब भी तबाह करना चाहेगा 
हमारे भारत को
हम फौजी रोक देंगे चट्टान बनकर राहें
यहां गुल भी है गुलजार भी है 
फूलों की खुशबू और भाईचारे का प्यार भी है
दुश्मन मुल्क की तो औकात नहीं 
जो आंख में आंख मिला कर बात कर सके 
पर क्या बताऊं हाल सफेदपोश चंद नेताओं का 
गाते हैं गुण दुश्मनों का अपने देश का नमक खाके 
सब अच्छा भी है दिल बच्चा भी है
इंसानियत का खून कर 
ये अदालत की नजर में अच्छा भी है
हर एक कड़ी हो 
भ्रष्ट बाइज्जत बरी हो
तकलीफ होती है सच्चाई को 
जहां झूठ ही झूठ हर घड़ी हो
यहां रोना भी है यहां हंसना भी है
हर हाल में यहां बसना भी है
प्रजातांत्रिक राज में
अपने हक को तरसना भी है
सच बोलने पर सजा होती है 
और झूठ बोलने पर मजा होती है
न्याय रोती है कारागार में 
और अन्याय गूंजे सभागार में
हम शिक्षा लिया बेकार में
नाकामी है सरकार में
मची है लूट व्यापार में
अकाल है रोजगार में
पढ़ लिखकर नौकरी के लिए चक्कर 
काटो दफ्तर और बाजार में
आस लगी है ना जाने कब से
अपने ही परिवार में
चाहिए नौकरी यदि लग जाओ रिश्वत के जुगाड़ में
जिंदगी जैसे डूब रही हो आके बीच मझधार में
गाना है तो गुनगुन आओ
सात सुरों के राग में
हूँ मैं एक फौजी हमेशा खेलता हूं बारूद और आग से
हूँ मैं एक फौजी हमेशा खेलता हूं बारूद और आग से

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हास्य अभिनेता राजू श्रीवास्तव को समर्पित..!

मेरे साथी भूल ना जाना
     सदा प्रेम का फूल खिलाना
जब आए मुश्किल वक्त कभी
     एक दुजे का साथ निभाना
जब कोई साथी हो उदास बैठा
     तो खुद भी हँसकर उसे हँसाना
    गुरूर ना करना खुद पर कभी
क्योंकि एक दिन यहां है
        सब छोड जाना
कर जाना कुछ ऐसा की 
दुनिया चाहे दिलों मे बसाना
       मेरे साथी भूल ना जाना
सदा प्रेम का फूल खिलाना
          अलविदा
चला मै आज जैसे एक दिन सबको है जाना
ना होना उदास कभी
     खुद हँसना औरों को हँसाना

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झारखण्ड में ह्यूमन ट्रैफिकिंग व बाल विवाह पर रोक जदयू की प्राथमिकता :- सुनील सिन्हा..!
युवा जदयू जिला इकाई ने बैठक कर किया संगठन विस्तार..!
साहिबगंज :-18/09/2022. जनता दल यूनाइटेड ने संगठन को मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए रविवार को उधवा प्रखण्ड के पतौडा झील स्थित कार्यालय में असरारुल हक की अध्यक्षता में बैठक कर संगठन विस्तार किया..! बैठक में सर्वसम्मति से असरारुल हक को युवा जदयू जिला संयोजक एवं महमुद आलम को युवा जिला महासचिव घोषित करते हुए दर्जनों सदस्यों को प्रखंड व पंचायतस्तरीय पदों पर मनोनीत किया..! सभी नवप्रतिनियुक्त पार्टी पदाधिकारियों एवं सदस्यों का जिलाध्यक्ष सुनील सिन्हा ने माला पहनाकर स्वागत किया एवं उन्हें मनोनयन पत्र सौंपा..! युवा मोर्चा के नवनियुक्त सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों को बधाई एंव शुभकामनाएं देते हुए सिन्हा ने कहा कि पार्टी की गरिमा और संविधान को ख्याल में रखकर प्रखंडस्तरीय सभी पंचायत और गांव-गांव में जदयू के संगठन को मजबूत बनाने का प्रयास करें..! पार्टी की मजबूती ही हम सबों की मजबूती है..! उन्होंने उम्मीद जताई कि नव मनोनीत पदधिकारीगण व सदस्यगण पार्टी की उम्मीदों पर खड़ा उतरेंगे..! सिन्हा ने कहा की बैठक में सर्वसम्मति से पार्टी को पंचायत स्तर तक मजबूत कराकर लोकसभा चुनाव में 2024 में नीतीश कुमार को प्रधानमंत्री बनाने एवं झारखंड में जदयू की सरकार गठन के लिए संगठन को बूथ स्तर तक मजबूती प्रदान करने का निर्णय लिया गया..! बैठक में मुख्य अतिथि युवा जदयू प्रदेश उपाध्यक्ष शीतल सिन्हा, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य कौशल कुमार, जदयू जिलाध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा, जदयू महासचिव मोहम्मद हातिम, युवा अध्यक्ष मोहम्मद अशरफ उल हक, युवा उपाध्यक्ष मोहम्मद रिंकू आलम, मोहम्मद जाबिर हुसैन, महासचिव राजीव कुमार मंडल, मोहम्मद सद्दाम हुसैन, सचिव विष्णु मंडल, मोहम्मद महमूद आलम, कार्यकारिणी सदस्य मोहम्मद फिरोज आलम, मतिउर रहमान, फजूल शेख, शमशेर, प्रखंड अध्यक्ष तनवीर शेख, जिला उपाध्यक्ष दिनेश सिंह, मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ कुमार, शेख मोहम्मद, इकबाल शेख, गिरिधारी शाह सहित दर्जनों जदयू कार्यकर्त्तागण उपस्थित थे..!

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छह दिवसीय ज्ञान गंगा स्कूल नेट इंडिया स्मार्ट क्लास प्रशिक्षण का समापन..!
साहिबगंज :- 16/09/2022. साहिबगंज जिला प्रशासन आकांक्षी जिला के तहत जिला शिक्षा पदाधिकारी दुर्गानंद झा एवं सहायक कार्यक्रम पदाधिकारी मनोज कुमार द्वारा आज छह दिवसीय ज्ञान गंगा स्कूल नेट इंडिया स्मार्ट क्लास प्रशिक्षण का समापन किया गया..! जो विगत 10/09/2022. से उत्क्रमित नगर पालिका गर्ल्स हाई स्कूल, पुरानी साहिबगंज में चल रही थी..! कार्यक्रम का शुभारंभ उपायुक्त रामनिवास यादव द्वारा किया गया था..! जिसमें उपायुक्त ने शिक्षकों को स्मार्ट क्लास का प्रशिक्षण प्राप्त कर विद्यार्थियों को विषय की प्रति रुचि व k-yan स्मार्ट क्लास का प्रयोग कर वर्ग को डिजिटल बनाने के लिए निर्देशित व प्रेरित किया था..! क्रियान्वयन एजेंसी स्कूल नेट इंडिया लिमिटेड के वरीय पदाधिकारी, जिला को -ऑर्डिनेटर सुमित कुमार और प्रशिक्षक विकास झा द्वारा जिले के शिक्षकों को स्मार्ट क्लास से संबंधित मल्टीमीडिया कंटेंट की प्रशिक्षण दिया गया..! ज्ञात ही कि राजमल विधायक अनंत कुमार ओझा भी प्रशिक्षण की सुविधा व अन्य जानकारियों का जायजा लेने विद्यालय पहुंचे थे..! प्रशिक्षण में प्रशिक्षु को स्वनिर्मित पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन, प्रोजेक्टर का रख-रखाव एवं मल्टीमीडिया कंटेंट सहित विभिन्न तकनिकी विषयों का गहन प्रशिक्षण दिया गया..!

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झारखण्ड में पूर्णतः शराबबंदी कानून लागू करवाना जदयू का सर्वोपरि लक्ष्य :- सुनील सिन्हा..!
तेज बारिश के बीच जारी रहा जदयू का सदस्यता महाअभियान..!
कार्यालय परिसर में नवसम्मलित सदस्यों का हुआ स्वागत..!
साहिबगंज :- 15/09/2022. गुरुवार को तेज बारिश के बीच जदयु जिला कार्यालय एल सी रोड में प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत साहिबगंज जदयू जिला अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा के द्वारा सदस्यता महाअभियान का शुभारंभ किया गया..! कार्यालय परिसर में नवसम्मलित सदस्यों का स्वागत किया गया..! सदस्यता महाअभियान से सम्बंधित जानकारी देते हुए जिला अध्यक्ष सिन्हा ने बताया कि समाज के वंचित वर्ग, महिला, अल्पसंख्यक एवं युवाओं को जागरूक कर सदस्यता अभियान को रफ्तार देने के लिए पार्टी कार्यकर्ता पूरे जिले में जोर-शोर से जनसंपर्क अभियान चला रहे है..! पार्टी के सर्वमान्य नेता सह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सकारात्मक सोच से प्रभावित होकर लोग स्वेच्छा से पार्टी से जुड़ रहे हैं..! कार्यकर्ताओं में नवऊर्जा का संचार करने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह 16 अक्टूबर को रांची में विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे, जहाँ पुरे झारखण्ड से हज़ारों- हज़ार की संख्या में कार्यकर्ता रांची के कार्यक्रम में शिरकत करेंगे..! मौके पर मोहम्मद हातिम जिला महासचिव जिला उपाध्यक्ष दिनेश प्रसाद सिंह नगर अध्यक्ष विनोद कुमार बबलू जिला सचिव मीडिया प्रभारी संदीप अवस्थी सह मीडिया प्रभारी सिद्धार्थ कुमार जिला कार्यकारिणी सदस्य कुंज बिहारी यादव एवं शेषनाथ यादव सहित दर्जनों जदयू कार्यकर्ता मौजूद थे..!

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कल से चलेगा जदयू सदस्यता महाअभियान, झारखण्ड में रचेगा इतिहास :- सुनील सिन्हा.!
साहेबगंज :- 14/09/2022. एलसी रोड स्थित कार्यालय में उपरोक्त जानकारी देते हुए साहेबगंज जिला जेडीयू अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा ने बताया कि कल दिनांक 15/09/2022 गुरुवार से सम्पूर्ण झारखंड में जदयू सदस्यता महाअभियान की शुरुआत की जा रही है..! साहेबगंज जिला जेडीयू कार्यालय एलसी रोड में जिला अध्यक्ष सुनील कुमार सिन्हा के द्वारा सुबह 10:30 बजे से कैंप लगाकर सदस्यता महाअभियान की शुरुआत की जाएगी साथ ही प्रखंड व पंचायत स्तर पर जिले में सदस्यता महाअभियान के अंतर्गत सदस्यों को जोड़ा जाएगा..! सिन्हा ने सदस्यता महाअभियान से सम्बंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करते हुए प्रखंड व पंचायत प्रभारी से कहा की नेतृत्व की अपेक्षाओं पर खरा उतरने के लिए हमें निरंतर गांव एवं सुदूर दुर्गम देहाती क्षेत्रों तक मेहनत करनी पड़ेगी..! इस अभियान में समाज के वंचित वर्ग, महिला, अल्पसंख्यक एवं युवाओं को जोड़कर हम संगठन को धारदार बना सकते हैं। कहा कि नीतीश कुमार की छवि एवं नीतियां आज राष्ट्रीय स्तर पर एक रोल माडल है। पार्टी के सदस्यता माहअभियान में इन नीतियों की जमकर चर्चा होगी..! नीतीश कुमार की नीतियों को जन-जन तक पहुंचाते हुए सदस्यता महाअभियान चलाया जाएगा l महाअभियान के अंतर्गत 15 सितम्बर से प्रखंड स्तर पर बैठक करने तथा 15 अक्टूबर तक इस अभियान को पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है..! लक्ष्य के अनुरूप सदस्यता महाअभियान को पूरा कर सम्पूर्ण झारखण्ड में इतिहास रचते हुए साहिबगंज जिला के नाम एक नया कीर्तिमान स्थापित किया जाएगा..!

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हर लम्हा हमें कुछ सिखाती है
हो इरादा नेक तो अंधेरा भी 
हमे रास्ता दिखाती है
नादान हूं चलता हूं लड़खड़ा के,
पर दिल कहता है ,
हौसला बुलंद रख,
पाएगा तू एक दिन मंजिल को
और गम में भी मुस्कुराती है
भला जो चाहूं मैं किसी का भला मेरी भी हो जाए
जिंदगी जिओ इस कदर यारों
कि दुश्मन भी दोस्त बन जाए
हुकूमत ना करना कभी किसी पर
करना हो राज अगर
तो हर किसी के दिल पर करो
अपने लिए तो सभी जीते हैं
हो सके तो औरों के लिए जी कर दिखाओ
यह जीवन बड़ी कीमती है प्यारे
हर गैरों को अपना बना कर दिखाओ
तालाब की गहराइयों को तो सभी बताते हैं
हो सके तो समुंद्र की गहराई बता कर दिखाओ
लोगों की शिकायतें तो सभी करते हैं 
हो सके तो अपनी कमियां बता कर दिखाओ,
खुद पर कभी अभिमान मत करना,
दौलत का कभी गुमान मत करना,
टूट जाएंगे गुरूर एक दिन,
बिना वजह किसी का अपमान मत करना,
खुद को औरों की जगह रख कर देखो
सही गलत का फर्क तुम परखो
मिल जाएगा हर सवाल का जवाब
सही वक्त पर जब पूछोगे आप
अपने उद्देश्यों से कभी पीछे मत हटना,
होती है तकलीफ इंसानियत के रास्ते पर ,
डटे रहना खुद की उसूलों पर
स्वयं को कभी सच्चाई से भटकने ना देना,
काट दो झूठ के हर जाल को
जला दो चारों और सच के मसाल को,
दिल से दिल लगी होती है पर निभाता है कौन ये दौर है ऐसा प्यारे
यहां अपने को तकलीफ में देख अपने भी हो जाते हैं मौन
लिखी थी चिट्टियां हजार रब को
पता थी हकीकत हमारी यहां सब को
 मिली ना किसी से मदद हमें 
खामोशी की आदत पड़ गई है लव को
तेरी तस्वीर के सहारे हर तनाव गुजर जाती है  
हां, हर लम्हा हमें कुछ सिखाती है
हर लम्हा हमें कुछ सिखाती है 

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वर्षों पुरानी बातें..! 
यदि आपने फुस की घर में
ताखा पर जलती डिबिया देखा है
मड़ई ( पलानी ) को समझा है।
ओसारा जानते हैं।
दुवार पर कचहरी (पंचायत) देखी है।
राम-राम के बेरा 
दूसरे के दुवारे पहुंच के चाय पानी पियें हैं।
गम्हार , नीम, बबुर से दतुअन किये हैं।
दिन में दाल-भात-तरकारी ,
तो कभी खीचड़ी चोखा खाये हैं।
किरिन फुटते हुए देखा है,
अंजोरिया रात मे,
अंगना मे खटिया बिछा के सोये हैं
रात में दिया और लालटेन जलाये हैं।
बरहम बाबा का स्थान आपको मालूम है।
डीह बाबा के स्थान पर गोड़ धरे हैं।
बगइचा के बगल वाले पीपर 
और स्कूल के रस्ता वाले बरगद के 
भूत का किस्सा (कहानी) सुने हैं।
हँसुआ, खुरपी, कचिया, कुदार देखे हैं।
दुपहरिया मे घूम-घूम कर 
आम, जामुन, अमरूद खाये हैं।
बारी बगइचा की जिंदगी जिये हैं।
चिलचिलाती धूप के साथ लू के गोद में 
बारी बगइचा में खेले हैं।
पोखर-गड़ही किनारे बैठकर लंठई किये हैं।
 5-10 संघतियन के साथ खेत मे कुल्ला मैदान किये हैं।
गोहूं, अरहर, मटर का मजा लिये हैं
अगर आपने जेठ के महीने की तेज दुपहरिया में 
खेंढ़ी का भात खाये हैं,
सतुआ का घोरुआ पिआ है,
बचपन में भकउआ बने है।
अगर आपने गाय को पगुरी करते हुए देखा है।
 बचपने में आइस-पाइस खेला है।
अगर आपने जानवर को लेहन और सानी खिलाया  है।
अगर आपने ओक्का-बोक्का तीन तलोक्का खेला है।
अगर आपने घर लिपते हुए देखा है।
अगर आपने सतुआ गुड़, मटर की घुघनी 
और केतारी का रस खाया और पिया है,
 कुदारी से कोड़ कर खेत का अड्डा बनाया है।
अगर आपने पोतन से चूल्हा पोतते हुए देखा है।
अगर आपने ठंढी मे  कउड़ ,घुरा, बोरसी तापा है।
अगर आप ने दीवाली के बाद दलिद्दर खेदते देखा है।
तो समझिये की आपने एक अद्भुत ज़िंदगी जी है, 
और इस युग में ये ज़िंदगी ना अब आपको मिलेगी 
ना आने वाली पीढ़ी को देखने और सुनने को मिलेगी ..
क्योंकि आज ये सब चीजें और बाते धिरे-धिरे विलुप्त होती जा रही हैं।

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है खुशनसीबी हमारी जो मिला साथ तुम्हारा,
थामे रहेंगे एक दूसरे का दामन, 
जिंदगी का मिल जाएगा किनारा,
मुश्किल हो शायद कभी जो देना तुम हमें एक इशारा,
लड़ जायेंगे हर मुश्किलों से, पर साथ ना छोड़ेंगे कभी तुम्हारा,
वादा करो कि तुम भी साथ निभाओगे इस कदर,
की घर परिवार का हर गम हो जाए बेअसर,
जिंदगी की कशमकश में तुम्हें बहुत सी शिकायतें मिलेंगी,
सच होगा सामने तुम्हारा, पर झुठ में दुनिया चलेंगी,
हर गम मे साथ हो हर खुशियों मे हाथ हों
बनेंगे एक ऐसी मिशाल
की हमारे जाने के बाद भी, हमारी ही बात हो ,
हम से जुड़ी हर शिकायतें कोशिश कर हमसे बताना ,
मिलकर करेंगे समाधान ताकि ना हो पीछे पछताना,
ना रहे एक दूसरे के प्रति किसी तरह का कोई मलाल,
हर मुसीबत में रहेंगे दूसरे के साथ बनके एक दूसरे की  ढाल..!

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मुश्किल भरी राहों में ,
जिंदगी की बांहों में ,    
इंसान कितना मसरूफ हो रहा,
दिन प्रतिदिन बन रहा डिजिटल युग ,
बन रहे सारे रिश्ते डिजिटल  ,
अपनेपन का एहसास और ,
प्राकृतिक सौन्दर्य खो रहा ,
जीवन सैली भूल रहें सब ,
तु ,तु ,मै, मै  हो रहा ,
राज कर रहे सोने वाले ,
और किसान भूखा सो रहा ,
अच्छाई की कदर नहीं ,
और बुराई रौशन हो रहा ,
मुस्कील भरी राहों में,
जिंदगी की बांहों में ,
 इंसान कितना मसरूफ हो रहा,
 अज्ञानी उपदेश दे रहे ,
ज्ञानी तो खामोश  हो रहा ,
बढ़ रही नफरत की हरियाली,
प्रेम का पतझड़ हो रहा ,
दिन प्रतिदिन बन रहा डिजिटल युग,
प्राकृतिक सौन्दर्य खो रहा 
दिन प्रतिदिन बन रहा डिजिटल युग, 
और प्राकृतिक सौन्दर्य खो रहा ।।

**************

हाथों की लकीर..!

मेरे हाथों में तेरी लकीर नहीं थी,
चाहा तुझे बनाना अपना तकदीर
शायद जमाने को यह मंजूर नहीं थी, 
सोचा भी ना था कभी की होंगी दूरियां इस कदर ,
भेदना चाहा जमाने के बुरी सोच को 
पर मेरे तरकस में ऐसी कोई तीर नहीं थी, 
थक हार कर बैठ गया ढूंढने चला इंसानियत 
तो मालूम हुआ कहीं कोई जमीर नहीं थी,
गुजारिश है वक्त से लौट आओ फिर से,
कोशिश किया बहुत मैने जोड़ दूं अपनी तकदीर से 
लेकिन मिली निराशा झूठी दिलासा , 
तोड़ दिया भरोसा उसने जो बैठा था मन मंदिर में,
अब लगने लगा है अकेलापन 
समझ ना आए क्या करूं, 
पूछते हैं सगे संबंधी क्या है उदासी का राज दिए बिना जवाब 
उनको बस सिर्फ तेरी ही याद करूं,
जिंदगी जीना मुश्किल हो गया है 
ऐसी मुश्किलें क्यों लाता है रब ,
भूल पाएंगे कैसे उन्हें 
और भी याद आने लगते हैं मैं उन्हें भूलाना चाहता हूं जब,
कर सकूं अपने जज्बातों को कैद ऐसी कोई जंजीर नहीं थी,
पलकों पर बिठा ना चाहा तुझे, लेकिन ऐसी मेरी तकदीर नहीं थी 
सोच सोच कर रो पड़ता हूं कि क्यों मेरे हाथों में तेरी लकीर नहीं थी
मेरे हाथों में तेरी लकीर नहीं थी..!

*****************

हांथ खाली हुआ मेरा
         तेरे शहर से जाते जाते
जान होती तो
      अपनी जान लुटाते जाते
अब तो हर हांथ का पत्थर हमे  पहचानता है,
   उम्र गुजार दिया 
      मैने तेरे शहर मे आते जाते
मेरी हालत देख साथी भी दूर चले
   जा रहे थे तो कोई जख्म लगाते जाते
   रेंगने की भी इजाजत नहीं है हमे
   वर्ना जहां जाते भावनात्मक प्रेम का फूल खिलाते जाते
मैं तो भड़कते हुवे आग का एक छोटा सा चिंगारी था,
     तुम तो बहती हुई दरिया थे,
अपनी शीतल नीर से इस चिंगारी
    को भी बुझाते जाते
हमे तो रोना भी नही आता
    बे मतलबी इस भीड़ में
हंस के जीना सीखाते जाते
     तेरे बगैर जीने का
 इल्म सिखाते जाते
हमसे पहले भी कई मुसाफिर 
   गुजरे होंगे इस रास्ते से ,
 कम से कम रास्ते का पत्थर तो हटाते जाते,
     यू ना गिरते एक बूंद भी आंसू 
  जमीन पर 
यदि प्रेम का पाठ पढ़ाते जाते

**************

प्रणाम नेताजी..!
कहीं का समाचार बा..??
सत्ता में आवे से पहीले कईले रही जवन वादा
    मिलल जब सत्ता के कुर्सी,
 हो के मगन भईनी विषभोर 
    लागत नईखे नीक हमके राउर ईरादा
याद बा की भूला गईनी
    कईल आपन वादा 
रउवा जईसन राजा के राज में
     काहें उदासी बा
 देश के मिजाज मे
       लगा के आश कईनी
वर्षों से तईयारी
     कहनी जे नोकरिया मिली
फेर काहे बढ़ल बेरोजगारी
    केतना गरीब मजदूरन के
कइनी सपना चूर
     अउवल दर्जा से 
जे पास हो जाला फिर भी घुस लीयाता भरपूर
      सोचीं कउनो उपाय
निकाली कउनों तरकीब
     निसहाय गरीब पिछड़ल मजदूर लोगन के
 बदलीं तनिका नसीब,
     देश खातिर सही मन से
दीं कुछ रोजगार
     भयमुक्त होखे समाज 
मिटे भ्रष्टाचार
    शासन प्रशासन के 
कमर कशी अब
     छोड़ के सब लाचारी
त्राहि त्राहि हो गइल अब
    नवयुवक में भरी
विनती बाटे हांथ जोड़ के
    मिटाई  बेरोजगारी 
प्रणाम ए नेता जी फेर जलदिए 
    आई बारी
माफी चाहत बानी टोकला
    खातिर, काहें की तानिका
 नादान बानी हम एही से
      कम बा समझदारी
प्रणाम ए नेता जी फेर जलदिये 
    आई बारी

******************

अजीब जुल्म करती हैं तेरी यादें मुझ पर
सो जाऊं तो जगा देती है और जग जाऊं तो रुला देती है
अनजान था मैं इश्क की राहों से और 
वक्त अचानक किसी अजनबी शख्स से मिला देती है
सोचा नही था कभी इश्क का अंजाम क्या होता है
तेरे जाने के बाद दिल आज भी बच्चा जैसा रोता है
खुदा गवाह था हमारे इश्क ए परवान का
लेकिन फिर भी ना जाने क्यों खून हुआ मेरे सच्चे ईमान का
ओह, बड़ा तड़पाती है जब कोई दिल तोड़ जाता है
जिसके सपने संजोया बड़ी शिद्दत से 
मुश्किलों में ही साथ छोड़ जाता है
अजीब जुल्म करती है तेरी यादें मुझ पर
सो जाऊं तो जगा देती है, और जग जाऊं तो रुला देती है l

*****************

इतनी आसानी से कैसे छोड़ दिया
टूटे दिल को दोबारा क्यों तोड़ दिया
कसमें तो साथ जीने मरने की खाई थी
फिर बीच सफर में तन्हा क्यों छोड़ दिया
तेरे साथ गुजारा वो हर पल याद आता है
बस एक तेरे ही ख्यालों में दिल तड़पता जाता है
भरोसे के धागों से बना रिसता क्यों तोड़ दिया
पल भर में वफा को बेवफ़ाई से क्यों जोड़ दिया
तेरे आने की उम्मीद कभी टूटती नहीं
अब तो सारी दुनिया बेगानी लगती है
ए चांद मेरे दिल के हर धड़कन में है तू
शायद इसलिए तुझे पाने की जिद छूटती नही
ऐसी क्या हुई बात जो जमाने 
मोहब्बत में जहर बो दिया
मैने रब से तो सिर्फ तुझे मांगा था
और तुमने ही खास बनकर
मुझे क्यों तोड़ दिया
ए चांद बस इतना बता दे
एक टूटे हुए दिल को दोबारा क्यों तोड़ दिया

*****************

घर आंगन में दीप जलाकर
   रचती है रंगोली बिटिया
शुभ मंगल की मौली बिटिया
हल्दी कुमकुम रोली बिटिया
ईद दिवाली या क्रिसमस
 हंसी खुशी की झोली बिटिया
सखी सहेली संग घुल मिलकर
 आंख मिचौली खेले बिटिया
   मन ही मन में बातें करती
सीधी साधी भोली बिटिया
    करो ना भ्रूण हत्या मेरी
करुण स्वर में बोली बिटिया
सृष्टि की आधार है बिटिया
   घर घर की श्रृंगार है बिटिया
 घर आंगन में दीप जलाकर 
रचती है रंगोली बिटिया

******************

आज हंसना है तुझे जितना तू हंस ले
एक दिन तु बहुत पछताएगा
आज कदर नहीं है तुझे मेरी
कल मेरे ना होने का गम तुझे सताएगा
आज बहाने ढूंढ रहे हो 
हमसे दूर होने की
कल करीब आने का
चाहत तुझे तड़पाएगा
आज मैं आंसू बहा रहा हूं तेरे खातिर
कल उस आंसू के लिए भी
तु तरस जाएगा
आज कदर नहीं है तुझे मेरी
कल मेरे ना होने का गम तुझे सताएगा
जिंदगी की सारी खुशियां लुटा दी मैने तुम पर
कल अपनी खुशियों से भी तु कतराएगा
लोगों के लिए मैं चाहें जैसा भी रहूं
पर साफ था दिल तुम्हारे लिए
जो वक्त भूल जाया करते थे हमसे
बात करते करते 
आज वक्त नहीं है उनके पास मेरे लिए
कोई बात नही किस्मत में जो है
वो बदल नही पाएगा
और एक मुझे चाहने से
कोइ मिल तो नही जायेगा
आज कदर नहीं है तुझे मेरी 
कल मेरे ना होने का गम तुझे सताएगा
शायद मुझसे बेहतर
कोई और होगा
तेरी जिंदगी में
लेकिन मेरे जैसा 
पागल प्रेमी ना बन पाएगा
आज कदर नहीं है तुझे मेरी
कल मेरे ना होने का 
गम तुझे सताएगा
हो सकता है चांद अपनी
चांदनी में मगरुर हो गईं हो आप
पर इतना याद रखिएगा
आपका अमु आपको 
कभी ना भुल पाएगा..!

****************

एक बेटे का फर्ज क्या होता है 
मैंने ये जाना मै चुप हूं तो 
उस मां की वजह से 
आपके लिए मैं शायद मर भी गया हूं 
लेकिन जिंदा हूं तो सिर्फ 
उस मां की वजह से
आप हमे चाहें या ना चाहें 
ये आपकी मर्जी
पर मेरे लिए मेरी चांद ही 
सब कुछ है हर जगह से 
आपका नाम मेरे दिलों मे है
आपका अमु मुश्किलों में है 
बहुत कम बची है उम्र उसकी
हर रोज बस लेता है नाम आपका
क्योंकि भले ही आप उसे भुला दीं हो
पर इतना पता है कि 
आज भी वो आपके दिलों में है 
क्योंकी ये प्यार है गहरा
बन के सहारा सोचा था
साथ निभाऊंगा
चाहें हो कितनी भी तकलीफें 
हर पल तुझपे खुशियां लुटाऊंगा 


*****************

मैं हूं राही मुझे चलना है
         हर शाम के बाद
     सुबह का सुरज
बन उभरना है
    मैं राही हूं मुझे चलना है
धूप में भी , छांव में भी
    सहर में भी गांव में भी
करना है बचाव
     लोगों के मन में 
फैली हैं जो कुरीतियां
   इसमें करना है प्रेम रूपी
  दवा का छिड़काव
बदल रहें हैं लोगों के स्वभाव
   बढ़ रहा है जातिवाद का भेद भाव
इसे मिलकर मसलना है
    मैं राही हूं मुझे चलना है
बुराइयों का शाम बनकर
    हमे तो ढलना है
मैं राही हूं मुझे चलना है
   मुस्किलों में रक्षक बन कर
अंधेरों में दीपक बन कर
     हमे तो जलना है
मैं राही हूं मुझे चलना है
     सच का साथ देकर
गुनाहों को मात देकर
     मुजरिमो को भी बदलना है
मैं राही हूं मुझे चलना है
    आंखों में ख्वाब लेकर
  दुश्मनों को जवाब देकर
     फौज की तरह बर्फीले
रेत में भी पिघलना है
     मैं राही हूं मुझे चलना है
सता का शासन बन कर
    न्याय का सिंघासन बन कर 
 होते अन्याय को कुचलना है
    मैं राही हूं मुझे चलना है
नदियां की धारा बन कर
    गरीबों का सहारा बन कर
हर हाल में आगे बढ़ना है
    मैं राही हूं मुझे चलना है
हर शाम के बाद
 सुबह का सुरज 
      बन उभरना है
मैं राही हूं मुझे चलना
   मैं राही हूं मुझे चलना

******************

मैं हूं राही मुझे चलना है
         हर शाम के बाद
     सुबह का सुरज
बन उभरना है
    मैं राही हूं मुझे चलना है
धूप में भी , छांव में भी
    सहर में भी गांव में भी
करना है बचाव
     लोगों के मन में 
फैली हैं जो कुरीतियां
   इसमें करना है प्रेम रूपी
  दवा का छिड़काव
बदल रहें हैं लोगों के स्वभाव
   बढ़ रहा है जातिवाद का भेद भाव
इसे मिलकर मसलना है
    मैं राही हूं मुझे चलना है
बुराइयों का शाम बनकर
    हमे तो ढलना है
मैं राही हूं मुझे चलना है
   मुस्किलों में रक्षक बन कर
अंधेरों में दीपक बन कर
     हमे तो जलना है
मैं राही हूं मुझे चलना है
     सच का साथ देकर
गुनाहों को मात देकर
     मुजरिमो को भी बदलना है
मैं राही हूं मुझे चलना है
    आंखों में ख्वाब लेकर
  दुश्मनों को जवाब देकर
     फौज की तरह बर्फीले
रेत में भी पिघलना है
     मैं राही हूं मुझे चलना है
सता का शासन बन कर
    न्याय का सिंघासन बन कर 
 होते अन्याय को कुचलना है
    मैं राही हूं मुझे चलना है
नदियां की धारा बन कर
    गरीबों का सहारा बन कर
हर हाल में आगे बढ़ना है
    मैं राही हूं मुझे चलना है
हर शाम के बाद
 सुबह का सुरज 
      बन उभरना है
मैं राही हूं मुझे चलना
   मैं राही हूं मुझे चलना

जिंदगी है एक रेस का घोड़ा
    हुआ सफल जो ना मेहनत छोड़ा
जो जितना है रेस के काबिल
   पाया उसने ऊतनी मंजिल
पल-पल समय का है अनमोल
   समय को दौलत से ना तुम तौल
करना है जो समय से करले
    इतना कर की खुशियां भरले
पछतावा ना रहे उस दौर का
      जो यू ही तू गंवाएगा समय
 तो रहेगा ना किसी ओर का
      सच्चे दिल से करना कुछ भी
 भले ही पाव सफलता थोड़ा
      जिंदगी है एक रेस का घोड़ा
हुआ सफल जो ना मेहनत छोड़ा
      करना ऐसा काम
हमेशा ले दुनिया तेरा नाम
     गुजर बसर तो सब करतें हैं
लेकिन कष्ट होती है
    नसीब वालों की

*****************

एक पिता के जैसा कोई 
जग में नहीं महान रे
एक पिता के जैसा कोई 
जग में नहीं महान रे
पिता है भगवान
वही हैं मेरी जहां
पिता है भगवान 
वही हैं मेरि जहां
जिसने हमें इस 
दुनिया में लाया
उंगली पकड़ कर
चलना सीखाया
मां का आंचल घर है मेरा
तो पिता हैं छत के समान रे
पिता हैं भगवान
वही हैं मेरी जहां
पिता हैं भगवान
वही हैं मेरी जहां
भुख लगे तो मईया खिलातीं
लोरियां गाके हमे सुलातीं
रूठूं जब मैं हम मनाते हैं
पिताजी हाथी घोड़ा 
बन फुसलातें आते हैं
बिठा के कंधे पर वो अपने
सैर कराते जहान रे
बिठा के कंधे पर वो अपने
देते अच्छे ज्ञान रे
पिता हैं भगवान
वही हैं मेरी जहां
पिता हैं भगवान
वही हैं मेरी जहां
एक पिता के जैसा कोई 
जग में नहीं महान रे 
एक पिता के जैसा कोई  
जग में नहीं महान रे
पिता हैं भगवान
वही हैं मेरी जहां
पिता हैं सम्मान
वही हैं भगवान
पिता हैं सम्मान
वही हैं भगवान



***********

हम हैं नादान
हमे कुछ सीखना है 
निकल के गरीबी की धूप से
मेहनत की बारिश में
भींगना है हमे
राहें जितनी भी कठिन हो
बिना परवाह किए
आगे बढ़ना है हमे
भले ही कोई साथ ना दे
तो क्या हुआ,
सारी बाधाओं को पार कर
हर दर्द से गुजरना है हमे
ना किसी से शिकवा है
ना किसी से गीला है
बस इतना ही जानता हूं
जिंदगी में जो कुछ भी पाया
वो सब मेरे कर्मों से मिला है
सोचा था कोई हमसफर होता
साथ निभाने को
जो मेरी तन्हाइयों को 
समझ पाता
भटकता जो राहें तो
हक जाता कर 
सही राह दिखलाता
पर सपने कहां अपने होते हैं
मतलब की जहां में
इंसान के जमीर दफने होते हैं
हम हैं नादान
हमे कुछ सीखना है

हॉप फॉर कैंसर पेशेंट्स टीम को समर्पित रचना..!

पुकार रहा आसमान
     कराह रही जमीं
बढ़ रहा है कोरोना 
     लगवालो वैक्सीन
निहोरा है आप से
  बचो कोरोना के अभिशाप से
    सर्तक रहें तो लड़ पाएंगे
        लापरवाही से पछताएंगे
    अपनो से दुर होना भी
         हो गई है मजबूरी
    हो जहां भीड़ इकठ्ठा
        दुरी दो गज की जरूरी
    आएगा वो दौर फिर से
      खुशियां मनाएंगे हम सब मिलके
       बस सुनो ये ध्यान से
           जीना है शान से
        आओ हम सब मिलकर
       प्रार्थना करें भगवान से
          अब बहुत हुआ प्रभु
        अब मुक्त कर दीजिए हिन्दुस्तान को
          कोरोना शैतान से
   गरीब मजदुर असहाय की सेवा
     में चलाई जा रही मुहिम
 इस जान लेवा महामारी में
    गदा धारी भीम बन कर
 लड़ रही हॉप फॉर कैंसर पेशेंट्स टीम
   रहन-सहन के तौर तरीके
दिए जाते बतलाए
   गांव-मुहल्ला, नगर-शहर में
  स्वस्थ सुरक्षित साफ रह टीका लियो लगवाय 
पुकार रहा आसमान
कराह रही जमीं
बढ़ रहा है कोरोना
लगवालो वैक्सीन

***************

लग गई लत चाय की
हो गए मजबूर
जब तक ना लें साथ हम
दो चाय की चुस्कियां
दिन ढलता नहीं हुजूर
सुबह हो या शाम हो 
चाहे जितना काम हो
सुबह से लेकर शाम तक 
शाम से लेकर सुबह तक
जिंदगी में सिर्फ काम ही काम है
खुदगर्जी की बात नहीं
हम दोस्तों में बात यही
होते हैं जब एक साथ हम
करते हैं खुब हंसी ठिठोली
चलते हैं जिस और हम
उधर ही बन जाती है टोली
करते रहते हैं एक दूजे की 
आपस में ही टांग खिंचाई है
जबसे मिले हम साथ हुए 
फिर शिकायत की कोई बात ना आई
मित्रता में इतने लीन हुए
की हो गए मशहूर
हाय राम अब क्या करें
लग गई लत चाय की 
हो गए मजबूर

***********

सुनs ए खैनी..!
बावे धईले बेचैनी,
आदत ई कईसन धरा दिहलु,
राह चलत केहू लोग बाग से
पल में भीखमंगवा दिहलु
सुनs ए खैनी, 
बावे धईले बेचैनी........
आदत ई कईसन धरा दिहलु
होत भोरहरिया, खोजी पंजरिया
खात में प्रेशर बढ़ा दिहलु
खाना-पीना सब कइला के बाद भी 
आपन याद करा गईलु
सुनs ए खैनी, 
बावे धईले बेचैनी......
आदत ई कईसन धरा दिहलु
धईनि जब से ई नासा
बिगड़ल बा दासा
दांत के इज्जत घटा दिहलु
घरे आईल जे अगुवा
बन गईलु कटुवा 
पच से थूक फेकवा दिहलु
सुन ए खैनी 
बावे धईले बेचैनी
आदत ई कईसन धरा दिहलु
हांथ में लेई चुना मिलाई
मुंह में रगड़ के जे डालीं
बाबू जी बाड़े बड़ परेशान 
रोज लाठी-लाठी पिटालीं
जब से जिंगी में आईलू
विपत बढ़ईलु 
सुघर दांत में चिति लगा दिहलु
अब खाईब ना खैनी
भले बढ़े बेचैनी  
अब दिल से तोहे विसरा दीहनी

प्रिय मित्रों तम्बाकू व ध्रूमपान सेहत के लिए हानिकारक है :- 

************************

हाय तौबा ये कैसी आफत आई है
एक तरफ है कोरोना
दूजा यास की तबाही है 
पहले तोड़ी कमर कोरोना
अब यास की असर भी छाई है
हैं काल कोरोना से प्रभावित 
और सबों में त्राहि त्राहि है
भूखे प्यासे मर रहे लोग 
घोर विपत्ति आई है
आया तूफान जो यास का
हुए घर से बेघर कुछ
गांव जल में समाई है
देख परिस्थितियां अपने देश की, 
हॉप फॉर कैंसर पेशेंट्स संस्था आई है ।
गुजरते हुए परिस्थितियों से 
लड़ने की हौसला जगाई है
हॉप फॉर कैंसर पेशेंट्स की टीम ने
जरूरतमंदों की मदद कर 
एक उम्मीद की दीप जलाई है 
हर मुसीबत में साथ रहेंगे
ऐसी विश्वास दिलाई है
हाय तोबा ये कैसी आफत आई है 
एक तरफ है कोरोना
दूजा यास की तबाही है..!


आई है आफत बनके कोरोना-2
घर में सब कोई रहो ना-2
घर से बाहर निकलो तबहिं-2 
जरूरत जब पड़ेगा-2
वायरस का यह खेल घिनौना-2
सब पर भारी पड़े ना 
घर से बाहर निकलो तबहिं 
जरूरत जब पड़ेगा 
छुआ-छूत का है ये मंजर-2 
सारा देश कहे ना......
घर से बाहर निकलो तबहिं 
जरूरत जब पड़ेगा....... 
बंद हुआ सब स्कूल कॉलेज-2  
रैली फिर भी चले ना 
लगे बाजार सड़क सब सुना 
पब्लिक हाथ मले ना-2 
शासन सत्ता की है मनमानी-2 
इनसे बच के रहो ना।
घर से बाहर निकलो तबहीं, 
जरूरत जब पड़ेगा-2  
होता बीमारी चाहे कुछ -2  
डॉक्टर कहे  कोरोना, 
घर में रहे जो बच ही जाय
हॉस्पिटल में है मरोना
घर से बाहर निकलो तबहिं 
जरूरत जब पड़ेगा।
आई है आफत बनके कोरोना-2  
घर में सब कोई रहो ना-2 
मास्क  पहन के जो नहीं चलता-2  
मास्क पहन के जो नहीं चलता 
पुलिस डंडा मारे ना-2 
घर से बाहर निकलो तबहिं, 
जरूरत जब पड़ेगा-2 
**************************

हर कोई चाहता है मिले कोई अपना
लेकिन किस्मत का भी खेल है यारों 
जिसे हम सबसे ज्यादा करीब रखतें है 
ना जाने वो क्यों हो जाता है सपना
करूं फरियाद तुझसे ए मेरे खुदा
अगर मिलाते हो किसी को तो
जुदाई मत देना 
जब भी हो नाराज कोई हमसे तो 
उसे खुश रखने का मौका भी देना
जानते है हम की 
रिश्ते निभाना इतना आसान नहीं होता 
और सच्चे रिश्तों का कोई प्रमाण नहीं होता, 
यूं तो बनते है अनगिनत रिश्ते संसार में,
लेकिन जो मुश्किलों में साथ दे,
वो शख्स कभी बेईमान नहीं होता..!

********************

         जुदाई..! 
रोना चाहूं रो ना पाऊं ।।
अपना दुख मैं किसे सुनाऊं
आपके होने से हिम्मत सी थी
वो हिम्मत अब कहां से लाऊं
ना थी चिंता ना थी चाहत
हमें किसी और बात की ।।
आप के रहते हुआ कभी ना
कमी किसी के साथ की
अब तो सारी दुनिया 
लगती है बेगानी सी ।।
होते थे जब साथ तो 
मुसीबत भी लगती सुहानी सी
अब तो आपका साथ नहीं
मैं कैसे खुद को मनाऊं ।।
रोना चाहूं रो ना पाऊं 
अपना दुख में कीसे सुनाउं
जिंदगी की हर मोड़ पर 
बस आपका ही सहारा था
दुख सुख में साथ मिलकर 
हमने समय गुजारा था
सोच सोच कर आंखे भर आती 
अब ये तड़प मै सह ना पाऊं
रोना चाहूं रो ना पाऊं
अपना दुख मैं किसे सुनाऊं
आप ही थे परमेश्वर मेरे
आप ही थे जेवर मेरे
आपसे ही से संसार था ।।
आपसे ही से श्रृंगार था 
निहारूं राहें इधर-उधर
पर कहीं ना दर्शन पाऊं
रोना चाहूं रो ना पाऊं 
अपना दुख में किसे सुनाऊं

*****************

मेरे पापा..!
याद आ रहा है वो पल 
जो गुजर गया कल
पिता के कंधों पर थे हम झूले
पिता के गोद में थे हम खेले
पर ना जाने आज 
वो कहां गुम हो गए, 
सता रही उनकी यादें, 
ऐ विधाता इतने बेदर्द 
क्यों तुम हो गए , 
उंगली पकड़कर 
जिसने चलना सिखाया 
अपने कंधों पर बिठाकर 
जिसने हमें घुमाया
क्यों चले गए वो दूर हमसे
क्यों छीना हमसे
मेरे पिता का साया
जब भी याद आती है उनकी 
मेरी आंखें भर आती है।
मां की उदासी हमें 
बहुत तड़पाती है
क्या करूं कुछ
समझ नहीं आता
तु चुप क्यों है , 
आज बोल विधाता 
किससे कहूं मैं अपनी 
दिल की बातें, 
किसे सुनाऊं 
मैं अपनी फरियादें 
जरा सी तकलीफ होने पर 
जो परेशान हो जातें
जब मैं रूठूं तो थे वो मनाते 
पिता जी मेरे शान थे
पिता जी मेरे भगवान थे
उनकी कमी हमें 
हर पल रूलाती है।।  
देखूं जो तस्वीर उनकी 
तो आंखें भर आती हैं।।
तूने ऐसा रित क्यों 
बनाया विधाता
जिसे तुमने ही मिलाया 
फिर क्यों वो बिछड़ जाता
कहां किस ओर मैं उन्हें खोजुं
कैसे मां की आंसुओं को पोछूं
ऐसा दर्द देना ना 
किसी और को
बहुत दर्द होती है 
निभाने में इस दौर को,
भले ही लोग मिले हजार
पर दे नहीं सकता कोई 
पिता जैसा स्नेह और प्यार
उनके ना होने से
मन में हो रही है  हलचल।
याद आ रहे है वो पल 
जो गुजर गया कल

************************

कब तक बेटियां यूं ही रोती रहेंगी
मैं पूछता हूं कब तक 
बेटियां मौत की नींद में सोती रहेंगी
क्या हो गया है इस जमाने को
हमारे देश में जिसे देवी का दर्जा देकर 
उनका सम्मान किया जाता है 
आज कुछ दरिंदों के वजह से 
हमारी बेटियां हमारी बहने 
सुरक्षित नहीं है 
आखिर में सरकार से 
यही प्रश्न करता हूं 
क्या कर रही है उनकी सरकार 
क्या कर रहे हैं वह सत्ता में आकर 
पहले तो बड़ी-बड़ी बातें करते हैं 
वादे करते हैं फिर कुर्सी मिलने के बाद 
वह कहां गुम हो जाते हैं 
मेरी सरकार से दरख्वास्त है की 
बेटियों के लिए कोई ऐसी कानून बनाएं 
जिससे बेटियां सदा के लिए स्वतंत्र हो जाए 
और निर्भय होकर अपनी जीवन जी सकें
ऐसे दरिंदे भेड़िए को तो जिंदा जला देना चाहिए 
पर सरकार इसे बचाने में क्यों लगी है 
इनका हस्तक्षेप क्यों करती है 
अब हमें कुछ सोचे बगैर 
इनको सबक सिखाना होगा
क्या होती है बेटियां 
इनकी नारी शक्ति को अब जगाना होगा
जिसे हम अबला नारी समझते 
और उसकी अवहेलना कर 
उसका अपमान करते हैं 
उसे प्रताड़ित करते हैं 
उसके साथ दुर्व्यवहार करते हैं 
हम यह भूल जाते है कि 
जिस देवी का हम अपमान कर रहे हैं 
वही देवी, मां, बहन 
और पत्नी के रूप में हमारे साथ होती है ।।
बेटी नहीं तो बहू कहां से लाओगे 
मत मारो इस तरह बेटियों को 
वरना नर्क में भी जगह नहीं पाओगे 
क्या मिलता है, क्या मिलता है 
इस तरह बेटियों को मार कर 
ऐसा घिनौना पाप करके 
कैसे अपनी मां बहन बेटियों को 
अपना मुंह दिखा पाओगे।
फांसी से ना होगा कुछ 
अब जिंदा जला दिए जाओगे..!

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जिंदगी में कुछ खास की तलाश करें।
वरना जिंदगी में भटकने के सिवा 
कुछ हासिल ना होगा ।।
मिलेगा सिर्फ पछतावा,
हासिल ए जिंदगी ।
हसरतों के सिवा कुछ भी नहीं।
ये किया नहीं वो हुआ नहीं ।
ये मिला नहीं वो रहा नहीं ।।
सब कुछ होते हुए भी 
हम दुखी होते हैं 
क्योंकि जो चाहा मैंने 
वो मिला नहीं, 
क्यों खफा हो ऐ जिंदगी
दीदार करा दे मेरे चांद से 
जी करता है हर पल उन्हें देखने को
कोई लाख बुराइयां करें उनकी
पर हमे उनसे कोई सिकवा गीला नहीं, 
आप मेरे लिए खास बन गए 
जो आज से पहले कभी मिला नहीं।।

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जैसे भी हैं खुश हैं हम 
और हर हाल में
खुश रहना जानते हैं 
चाहें खुशी हो या गम 
कभी न होंगे नम
सुख में मुस्कुराते हैं लोग 
पर जो दुख में भी मुस्कुराए
कुछ ऐसे ही हैं हम 
नफरत में क्या रखा है दोस्तों 
एक-दूसरे के साथ मिलकर 
खुशियां बांटते हैं हम
अमीरी-गरीबी की परवाह नहीं हमें 
ना ही जातिवाद का भ्रम,
जन्मे है इंसान बनकर 
इंसानियत ही निभाएंगे हम, 
हर हाल में खुश रहना जानते हैं 
चाहे खुशी हो या गम

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                 आगाज़..!
मत छेड़ मुझको लड़ना मुश्किल होगा। 
लिखेंगे ऐसा इतिहास कि पढ़ना मुश्किल होगा।
बार-बार सुधारने का मौका दे रहे हैं हम, 
सुधर जाओ तो अच्छा होगा।
चीनी हो या पाकिस्तानी, 
या हो कोई दुश्मन हिंदुस्तान का।
डाली जो बुरी नजर हिंदुस्तान पर 
नसीब ना होगा जमीन 
श्मशान या कब्रिस्तान का।
छुप-छुप के करते वार तुम 
तो वीर कैसे कहलाओगे।
हम हिंदुस्तानी फौजी हैं
तुम जीत कहां से पाओगे।
हैं,भारत मां के वीर सपूत 
ये खाके कसम हम कहते हैं। 
लेंगे बदला हर जवान का, 
डाली जो बुरी नजर 
हिंदुस्तान पर नसीब ना होगा 
श्मशान या कब्रिस्तान का।

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ए वक्त क्यों रूठ गया तू
पहले तो दुख में भी मुस्कुराता था 
जिंदगी जी रहें थे खुशी से
भले ही लाख मुसीबत आता था
अब ना जाने ऐसा क्यों लगता है 
की कोई मेरी असफलता पर 
मेरा मजाक उड़ाता है  
ए मेरे वक्त,
क्या भूल हुई थी हमसे..?? 
जो तूने ऐसी किस्मत बनाई है
आगे कुआँ पीछे खाई है 
कहां जाएं, कुछ समझ नही आता..!!
ए वक्त क्यों रूठ गया तू
पहले तो दुख में भी मुस्कुराता था
जिंदगी जी रहे थे खुशी से
भले ही लाख मुसीबत आता था


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अच्छे भले थे खुशहाल
भेज कोरोना किया बेहाल
ऐसी क्या थी दुश्मनी हमसे 
जो वायरस का ही बनाया जाल
जब लड़ना था ही तो
हथियारों से लड़ते 
फिर तुम घुटनों के बल गिरते
तेरे कारण ही पड़ी आकाल
गरीब मजदूरों की खुशियां छीनी
करेंगे ना माफ सुन ले चीनी
तैयार किया जो कोरोना काल
लड़ रहें हम तत्काल
पर अब जो मेरा वार होगा
बस तेरा ही संघार होगा

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एक होकर, नेक होकर, 
चलेंगे हम साथ-साथ..!
राहें भले ही कठिन हो,
पर रचेंगे हम नया इतिहास..!!
एक होकर, नेक होकर
चलेंगे हम साथ-साथ..!
मिट जाएंगी तकलीफें सारी,
लाएंगे नया प्रभात..!!
एक होकर, नेक होकर, 
चलेंगे हम साथ-साथ..!
दुश्मन भी अपने दोस्त होंगे,
जब करेंगें मिलकर बात..!!
सपने भी अपने होंगे जब, 
मिलकर करेंगे प्रयास..!!
एक होकर, नेक होकर,
चलेंगे हम साथ-साथ..!!
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माँ तो माँ होती है..!!
माँ का स्थान कौन ले सकता है..??
एक पुत्र को जन्म से जवानी तक, 
कौन संभाल सकता है..??
माँ तो माँ होती है..!
भला माँ का स्थान कौन ले सकता है..??
जब भी थका हरा घर आऊं,
तो माथे का पसीना कौन पोछता है..??
मां भले ही दुख में हो, 
पर पुत्र समझ ना पाता है..!
माँ तो माँ होती है..!!
भला माँ का स्थान कौन ले सकता है..?? 
धन दौलत तुम लाख कमा लो पर,
सकून माँ का आंचल ही बरसाता है..!
माँ तो माँ होती है..!!
भला माँ का स्थान कौन ले सकता है..?? 

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हिंदी की बिंदी लागे है प्यारी,
हिंदी है हम सबकी दुलारी..!
हिंदी शब्द है सबसे न्यारी,
हम भारतीयों को हिंदी प्यारी..!!
जब भी हम जाते कभी परदेश में,
गैरों के संग बन जाती रिश्तेदारी..!! 
यही वजह है हम गर्व से कहते, 
हिंदी को समर्पित मेरी दिल ओ जान है
हिंदी मेरी मातृभाषा और हिंदी ही मेरी मां है....2


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वतन की मिट्टी में हैं जन्मे,
सरफरोशी हम गाएंगे..! 
अगर जो आंख दिखाए वतन को,
उसको ना बख्श पायेगें..! 
वतन की मिट्टी में हैं जन्मे,
सरफरोशी हम गाएंगे..!
हो चीन या पाकिस्तान,
दोस्ती का भाव दिखाएंगे..!
झुक गए हम जो ये समझ तुम,
तो सर भी तेरा मुंडवाएंगे..!
हिन्द की मिट्टी में हैं जन्मे,
सरफरोशी हम गाएंगे..!
अगर जो मेरी खामोशी को,
दुश्मन हार बताएंगे..!
तो खैर नहीं उनकी,
हम रौद्ररूप अपनाएंगे..!
भारत की मिट्टी में हैं जन्मे,
भारत के ही गुण गाएंगे..!
वतन की मिट्टी में हैं जन्मे,
सरफरोशी हम गाएंगे..!

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एहसास अपनों का, 
और प्यास सपनों का, 
इंसान को...   
कर्मठ एवं जुझारू बना देती है..!! 
मेहनत करना और विनम्र रहना, 
हमें सच्चा इंसान बना देती है..!! 
लोग क्या कहते हैं..? 
लोग क्या करते हैं..?? 
हम इन बातों में उलझे रहते हैं..! 
और इसी बातों में हम.. 
अपना समय गंवा देते हैं..!
                            

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गुजरा जमाना याद आ रहा है,
एक तेरी ही याद.... 
हमें क्यों सता रहा है..!!
सोचा था कि साथ चलेंगे... 
हम दोनों एक ही रास्ते पर,
लेकिन रब का इशारा... 

क्यों कुछ और बता रहा है..!!
जिंदगी भले ही कांटों से भरी हो... 
तो क्या हुआ..??
लेकिन सच्चे राह पर चलना तो,
हमें वह कांटे ही सिखा रहा है..!!
लाख बुरा छुपा लो अपने मन में,
कुछ भी ना मिलेगा... 
क्योंकि यह दिल सत्यमेव जयते गुनगुना रहा है..!!
क्योंकि यह दिल सत्यमेव जयते गुनगुना रहा है..!!

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आलेख :- रब नवाज़ आलम نامنگار :- ربنواز عالم

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